महासमुंद में सियासी भूचाल: अविश्वास प्रस्ताव से पहले सत्ता का ‘खूनी खेल’! अगवा किए गए पंच की यूपी में रहस्यमयी मौत!…जाने पूरा मामला…

महासमुंद/पिथौरा: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सत्ता की भूख ने एक खौफनाक और खूनी शक्ल ले ली है! पिथौरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत ठाकुरदिया खुर्द से एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पूरे जिले के पुलिस-प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
3 जुलाई को होने वाले अविश्वास प्रस्ताव के मतदान से ठीक पहले, वार्ड क्रमांक 2 के पंच केशव राम सिन्हा की उत्तरप्रदेश के घूरपुर में बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में दर्दनाक मौत हो गई है। यह सिर्फ एक हादसा है या कुर्सी हथियाने के लिए रची गई कोई खौफनाक ‘पॉलिटिकल मर्डर मिस्ट्री’? वर्तमान सरपंच ने इसे सीधा ‘अपहरण और सुनियोजित हत्या’ करार देकर पूरे जिले में आग लगा दी है!
कुर्सी की जंग और मौत का सफर : क्या है पूरा मामला? – ग्राम पंचायत ठाकुरदिया खुर्द में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पिछले कई दिनों से शह-मात का गंदा खेल चल रहा था। पंचों की खरीद-फरोख्त और उन्हें अंडरग्राउंड करने की साजिशें रची जा रही थीं। इसी बीच, पंच केशव राम सिन्हा अचानक गांव से गायब हो जाते हैं और सीधे उनकी मौत की खबर उत्तरप्रदेश से आती है।
वर्तमान सरपंच मनोज सिन्हा ने गांव के ही विपक्षी खेमे के अजय नायक और मिथुन पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीधा बम फोड़ा है। उनका दावा है कि वोटिंग का गणित बिगाड़ने के लिए केशव राम को धोखे से गाड़ी में बैठाया गया और फिर उन्हें अगवा कर छत्तीसगढ़ से सैकड़ों किलोमीटर दूर यूपी ले जाया गया, ताकि वो 3 तारीख को वोट न डाल सकें!
वो आखिरी ‘डेथ कॉल’ : “मुझे उठा लाए हैं, 2 तक न लौटूं तो पुलिस को बुलाना!” – इस पूरी वारदात में सबसे बड़ा और रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा सरपंच मनोज सिन्हा ने किया है। घटना से ठीक पहले मृतक पंच केशव राम ने अपनी मौत की भविष्यवाणी कर दी थी!
सरपंच के मुताबिक, केशव ने फोन पर कांपती हुई आवाज में बताया था :
“मुझे मेरी मर्जी के खिलाफ जबरदस्ती उठा लाया गया है। ये लोग मुझे अविश्वास प्रस्ताव में वोट नहीं डालने देना चाहते। मैं किसी तरह 2 तारीख तक वापस आने की कोशिश करूंगा, लेकिन अगर मैं न आ पाऊं, तो तुरंत पुलिस को खबर कर देना!”
और इस फोन कॉल के कुछ ही घंटों बाद… केशव की यूपी में लाश मिलती है। क्या यह महज़ इत्तेफाक हो सकता है?
कातिल ऑटो या रची-रचाई साजिश? आरोपी की ‘अयोध्या थ्योरी’ – इस पूरे मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट विपक्षी खेमे के अजय नायक की कहानी है। जो शख्स पंच को अपने साथ ले गया था, उसने इस पूरी वारदात को एक ‘दुर्घटना’ का जामा पहनाया है।
अजय नायक का दावा :
- हम सभी कार से भगवान रामलला के दर्शन करने अयोध्या धाम जा रहे थे।
- रात 10 बजे यूपी के घूरपुर (सरंगापुर) में ‘श्री बाबा ढाबा’ पर खाना खाने रुके।
- तभी केशव के मोबाइल पर एक फोन आया, वो बात करते-करते सड़क की तरफ गया और पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ऑटो ने उसे कुचल दिया!
लेकिन ये सवाल चीख-चीख कर जवाब मांग रहे हैं :
- अगर पंच अपनी मर्जी से रामलला के दर्शन करने जा रहा था, तो उसने सरपंच को फोन करके ‘किडनैपिंग’ की बात क्यों कही?
- ढाबे पर रात 10 बजे अचानक ऐसा किसका फोन आया, जिसने केशव को सड़क तक खींच लिया और ठीक उसी वक्त ‘कातिल ऑटो’ ने टक्कर मार दी?
- क्या वह ऑटो महज एक दुर्घटना था या सुपारी देकर बुलाया गया मौत का वाहन?
महासमुंद में भड़का भारी आक्रोश : “दूध का दूध और पानी का पानी हो!” – इस मनहूस खबर के आते ही ठाकुरदिया खुर्द गांव में मातम और भयंकर आक्रोश पसर गया है। मृतक पंच के बदहवास परिजन आनन-फानन में उत्तरप्रदेश के लिए रवाना हो गए हैं, जहां यूपी पुलिस शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम कर रही है।
महासमुंद जिले में इस घटना के बाद बवाल मचने के आसार हैं। सरपंच मनोज सिन्हा और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और राज्य सरकार से सीधी मांग की है कि इस पूरी ‘क्रोनोलॉजी’ को समझा जाए। यह एक आम सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का गला घोंटने के लिए की गई हत्या है।
क्या महासमुंद पुलिस और यूपी पुलिस मिलकर इस ‘सियासी मर्डर मिस्ट्री’ से पर्दा उठा पाएगी? या एक और बेगुनाह पंच की मौत राजनीति की फाइलों में दबकर रह जाएगी? पूरे जिले की निगाहें अब 3 जुलाई की वोटिंग और पुलिस की जांच पर टिकी हैं!




