ब्रेकिंग सटायर : सारंगढ़ आत्मानंद स्कूल में ‘नो-एडमिशन क्रांति’, प्राचार्य महोदय ने कैमरे पर खोला सरकार का ‘ऑपरेशन अनपढ़’…

सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ में शिक्षा क्रांति के नाम पर ढिंढोरा पीटने वाली ‘स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना’ ने आखिरकार अपना असली ‘उत्कृष्ट’ रूप दिखा ही दिया है। सारंगढ़ के गोड़म स्थित आत्मानंद स्कूल में शिक्षा का ऐसा ‘ग्रैंड फिनाले’ चल रहा है कि विदेशी शिक्षा मॉडल भी शर्म से पानी-पानी हो जाएं। स्कूल के प्राचार्य ने कैमरे के सामने सरकार के जिस “सीक्रेट विजन” का पर्दाफाश किया है, उसके बाद तो शिक्षा विभाग को नोबेल शांति (या शायद सन्नाटा) पुरस्कार के लिए नॉमिनेट कर देना चाहिए!
प्राचार्य का ‘गोड़म थ्योरम’ : रामानुजन के बाद गणित का सबसे बड़ा आविष्कार – जब एक बेचारा पालक अपने बच्चे को 10वीं में दाखिला दिलाने पहुंचा, तो प्राचार्य महोदय ने उसे जो ‘तुगलकी गणित’ समझाया, वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सिलेबस में शामिल होने लायक है।
नियम कुछ यूं है: “चूंकि 9वीं से 60 बच्चे पास होकर 10वीं में गए हैं, इसलिए बाहर से हम सिर्फ 10% यानी मात्र 6 बच्चों को ही लेंगे।”
वाह! क्या गजब की ‘छंटनी तकनीक’ है। अगर इस हिसाब से देश चला, तो अगली बार अस्पताल में भी यही बोर्ड लगेगा – “आज 60 मरीज ठीक हुए हैं, इसलिए आज सिर्फ 6 नए मरीजों को ही बीमार पड़ने की अनुमति है!”
कैमरे पर ‘ट्रुथ बम’ : गुरुजी ने लीक कर दिया सरकार का ‘सीक्रेट मेनिफेस्टो’ – स्टिंग ऑपरेशन में प्राचार्य महोदय इतने बेबाक नजर आए, मानो उन्होंने कसम खा रखी हो कि आज ‘सत्यवादी हरिश्चंद्र’ का सारा रिकॉर्ड तोड़ देना है। उन्होंने बिना किसी झिझक के सरकार के उस ‘मास्टरप्लान’ का खुलासा कर दिया, जिसे अब तक बेहद गुप्त रखा गया था:
- ‘हिडन’ प्रीमियम फीस : आत्मानंद और सरकारी स्कूल मुफ्त हैं? जी नहीं! गुरुजी के अनुसार अब अंदरखाने यहाँ भी फीस वसूली का ‘प्रीमियम सब्सक्रिप्शन’ शुरू हो गया है। आखिर ‘उत्कृष्टता’ मुफ्त में थोड़ी आती है!
- इको-फ्रेंडली स्कूल बंदी योजना : सरकार धीरे-धीरे स्कूलों को बंद करके प्रकृति को बचाने का महान काम कर रही है। जब स्कूल ही नहीं होंगे, तो कागज बचेगा, पेड़ बचेंगे!
- ‘नो टीचर, नो टेंशन’ पॉलिसी : स्कूलों में नए शिक्षकों की भर्ती इसलिए नहीं हो रही है ताकि बच्चे ‘सेल्फ-स्टडी’ करके सीधे आइंस्टीन बन जाएं। शिक्षक रहेंगे तो बच्चे उन पर निर्भर हो जाएंगे ना!
- गरीब मुक्त शिक्षा : प्राचार्य का सबसे बड़ा और अंतिम निष्कर्ष – “सरकार की मंशा ही यही है कि गरीब के बच्चे पढ़ ही न पाएं!” जाहिर है, अगर सारे गरीब बच्चे पढ़-लिखकर साहब बन जाएंगे, तो फिर मनरेगा में गड्ढे कौन खोदेगा?
जनता के ‘बेवकूफाना’ सवाल (जिनका कोई मतलब नहीं है) – इस वीडियो के बाद कुछ ज्यादा पढ़े-लिखे (और शायद नासमझ) ग्रामीण और छात्र संगठन भड़क गए हैं और ऐसे सवाल पूछ रहे हैं जिनका हमारे ‘सिस्टम’ में कोई लॉजिक नहीं है:
- बाकी बच्चे कहाँ जाएंगे? अरे भाई, 6 बच्चों को तो ‘लकी ड्रॉ’ में एडमिशन मिल गया। बाकी के दर्जन भर बच्चे क्या करेंगे? सिंपल सी बात है— मजदूरी करेंगे, पकोड़े तलेंगे और देश की अर्थव्यवस्था को ‘ग्राउंड लेवल’ से मजबूत करेंगे!
- आत्मानंद मॉडल का क्या हुआ? मॉडल बिल्कुल सफल है! यह ‘प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर’ बना था। और प्राइवेट स्कूलों का पहला नियम क्या है? “एडमिशन में नखरे दिखाना।” गोड़म स्कूल ने इसे शत-प्रतिशत लागू कर दिया है।
आगे क्या होगा? (स्पॉइलर अलर्ट) -अब चूंकि प्राचार्य महोदय ने कैमरे पर इतनी भयानक सच्चाई उगल दी है, तो इस बात की पूरी गारंटी है कि अब सारंगढ़ का जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग (DEO) तुरंत ‘कठोर कार्रवाई’ का नाटक करेगा।
एक जांच कमेटी बैठेगी (जिसमें समोसे-चाय का खर्च निकलेगा), वीडियो को ‘कांट-छांट’ कर पेश किया हुआ बताया जाएगा, और अंततः इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालकर उस पर एक ‘उत्कृष्ट’ ताला जड़ दिया जाएगा। और हाँ, वह गरीब पालक? वह शायद अब भी स्कूल के बाहर उन 6 ‘लकी’ बच्चों की लिस्ट में अपने बच्चे का नाम ढूंढ रहा होगा!
धन्य है ऐसी शिक्षा व्यवस्था, और शत-शत नमन हैं ऐसे नीतिकारों को!




