बालोद आबकारी में महासंग्राम : 53 पेटी शराब कांड में उप निरीक्षक सस्पेंड, एडीइओ पर गाज तय; तत्कालीन आबकारी अधिकारी पलक नंद का विवादों से पुराना नाता

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
विशेष रिपोर्ट (छत्तीसगढ़)| छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आबकारी विभाग के भीतर चल रहे कथित ढर्रे, विभागीय शिथिलता और अंदरूनी खींचतान की कलई अब पूरी तरह खुल चुकी है। पड़ोसी जिले धमतरी के अर्जुनी थाना क्षेत्र में 53 पेटी अवैध शराब की बरामदगी के बाद शुरू हुआ प्रशासनिक बवंडर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आबकारी आयुक्त के कड़े रुख के बाद विभागीय जांच की गाज जहाँ उप निरीक्षक आशा राम शाक्य पर निलंबन के रूप में गिरी है, वहीं सहायक जिला आबकारी अधिकारी (एडीईओ) निलोफर जैन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव राज्य शासन को प्रेषित किया गया है। लेकिन इस समूचे घटनाक्रम के केंद्र में बेमेतरा से स्थानांतरित होकर बालोद पहुंचे जिला आबकारी अधिकारी पलक नंद की कार्यशैली और उनका विवादित अतीत अब खुलकर सामने आने लगा है।

53 पेटी शराब की जब्ती ने उधाड़ी विभागीय व्यवस्था की पोल
इस पूरे मामले का पटाक्षेप बीते 30 जुलाई को हुआ, जब धमतरी जिले की अर्जुनी पुलिस एवं आबकारी की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर नाकाबंदी कर 53 पेटी अवैध शराब का जखीरा जब्त किया। जब बोतलों में लगे होलोग्राम और बैच नंबर की सूक्ष्मता से पड़ताल की गई, तो यह चौंका देने वाला खुलासा हुआ कि जब्त की गई मदिरा किसी अंतरराज्यीय तस्कर की नहीं, बल्कि बालोद जिले की शासकीय ‘देशी कंपोजिट मदिरा दुकान अरकार’ से जारी की गई थी।
सरकारी मदिरा दुकान से इतनी बड़ी मात्रा में थोक में शराब का बाहर निकलना और दूसरे जिले की सीमा तक पहुँच जाना इस बात का पुख्ता प्रमाण था कि जिले की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। बड़ी बात यह है कि इससे पहले बालोद आबकारी विभाग में ऐसा कृत्य पहले कभी नहीं हुआ।
निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई : गाज गिरी कनिष्ठों पर
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब उच्चस्तरीय जांच कराई गई, तो जांच दल ने गुरूर वृत्त के प्रभारी उप निरीक्षक आशा राम शाक्य की कार्यप्रणाली में गंभीर लापरवाही और उदासीनता पाई। आबकारी आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से आशा राम शाक्य को निलंबित कर उनका मुख्यालय उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता दुर्ग संभाग संबद्ध कर दिया।
इसके साथ ही, अरकार मदिरा दुकान एवं संबंधित मंडल की प्रभारी अधिकारी निलोफर जैन (सहायक जिला आबकारी अधिकारी) को पदीय दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता का दोषी पाया गया। चूंकि वे एक राजपत्रित अधिकारी हैं, अतः उनके विरुद्ध नियम सम्मत विभागीय जांच और कठोर कार्रवाई का प्रस्ताव वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग, मंत्रालय (महानदी भवन) को भेज दिया गया है।

बेमेतरा से बालोद तक : जिला आबकारी अधिकारी पलक नंद का प्रशासनिक रिकॉर्ड
बालोद की इस कार्रवाई के बीच विभागीय गलियारों और गुप्त सूत्रों में यह चर्चा जोरों पर है कि अधीनस्थ अधिकारियों को बलि का बकरा बनाकर मुख्य रणनीतिकारों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस पूरी कसमकश के बीच बालोद के वर्तमान जिला आबकारी अधिकारी डॉ. पलक नंद का पिछला कार्यकाल भी सवालों के घेरे में आ गया है।
बेमेतरा में ओवर-रेटिंग और कोचिया प्रथा का था बोलबाला
बालोद स्थानांतरण से पूर्व पलक नंद बेमेतरा जिले में पदस्थ थे। उनके कार्यकाल के दौरान जिले की अधिकांश शासकीय शराब दुकानों से तय दर (MRP) से अधिक वसूलने (ओवर-रेटिंग) की निरंतर शिकायतें मिलती रहीं। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब तस्करों (कोचियों) के माध्यम से गाँव-गाँव शराब पहुँचाने के नेटवर्क पर अंकुश लगाने में आबकारी विभाग पूरी तरह असफल नजर आया।
कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल की तल्ख फटकार
बेमेतरा में विभागीय ढिलाई इस कदर हावी थी कि स्वयं प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति कैबिनेट मंत्री तथा स्थानीय नवागढ़ विधायक दयालदास बघेल को सार्वजनिक रूप से हस्तक्षेप करना पड़ा। जिला स्तरीय समीक्षा बैठक और मीडिया के समक्ष मंत्री बघेल ने तत्कालीन आबकारी अधिकारी पलक नंद को आड़े हाथों लेते हुए तीखा सवाल दागा था— “आखिरी गांव में दारू कौन बिकवा रहा है?”
मंत्री ने सार्वजनिक मंच से आबकारी विभाग के लचर नियंत्रण पर सख्त नाराजगी जताई थी और चेतावनी दी थी कि यदि अवैध बिक्री और ओवर-रेटिंग पर तत्काल लगाम नहीं कसी गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कदम उठाए जाएंगे।
तबादले के बाद भी इनकी कार्यशैली पर सवाल
मंत्री की फटकार और प्रशासनिक स्तर पर उठ रहे गंभीर सवालों के बाद शासन ने प्रशासनिक सर्जरी करते हुए पलक नंद को बेमेतरा से हटाकर बालोद भेज दिया। हालांकि, बालोद आते ही 53 पेटी शराब का इतना बड़ा प्रकरण सामने आने के बाद अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या केवल कनिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई कर विभाग अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेगा, या फिर जिला स्तर के शीर्ष प्रशासनिक नियंत्रण की भी जवाबदेही तय की जाएगी?
प्रशासनिक जवाबदेही पर लगा बड़ा प्रश्नचिह्न
बालोद के इस घटनाक्रम ने प्रदेश में सरकारी शराब दुकानों के संचालन, स्टॉक इन्वेंट्री, और पारदर्शी वितरण प्रणाली के दावों की पोल खोल कर रख दी है। जहाँ एक तरफ विभाग इसे ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति बता रहा है, वहीं अंदरूनी गुटबाजी और कनिष्ठों को मोहरा बनाने के आरोपों ने विभागीय निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि शासन स्तर से इस पूरे मामले में केवल सतही कार्रवाई होती है या फिर जड़ तक पहुँचकर व्यवस्था को दुरुस्त किया जाता है।




