“गांधी” के वार्ड में पसरा अवैध सट्टे का संजाल : क्या नए थाना प्रभारी कसेंगे “खिलावन” के सट्टा साम्राज्य पर नकेल?

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। कानून-व्यवस्था की साख को चुनौती देता अवैध गतिविधियों का जाल जब किसी क्षेत्र की शांति और सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने लगे, तो शासन-प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। जिला बालोद के दल्ली राजहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाला “गांधी चौक” इन दिनों विकास के किसी नए प्रतिमान के कारण नहीं, बल्कि खुलेआम संचालित हो रहे अवैध सट्टेबाजी के कारोबार को लेकर एकाएक सुर्खियों के केंद्र में आ गया है। स्थानीय नागरिकों, वार्डवासियों और सामाजिक संगठनों की चिंताओं को दरकिनार कर बेधड़क चलाए जा रहे इस काले धंधे ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और स्थानीय राजनीतिक संरक्षण पर कई गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

गांधी चौक और आसपास के इलाकों में पैर पसार चुके इस गैर-कानूनी नेटवर्क की कमान “खिलावन” नाम के एक दिव्यांग व्यक्ति के हाथों में बताई जा रही है। स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी शारीरिक सीमाओं के बावजूद कानून और पुलिसिया तंत्र की आँखों में धूल झोंकते हुए इस अवैधानिक गतिविधि का संचालन बड़ी धमक और बेफिक्री के साथ कर रहा है।
समाचार पत्रों एवं क्षेत्रीय न्यूज़ पोर्टलों और चैनलों में लगातार इस संदर्भ में खबरें प्रसारित होने के बावजूद, अब तक बालोद जिला पुलिस की ओर से कोई ऐसा कठोर या निर्णायक कदम नहीं उठाया गया है, जिससे इस नेटवर्क को जड़ से उखाड़ा जा सके। पुलिस की ढिलाई के चलते अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र का माहौल दूषित हो रहा है और युवा पीढ़ी गलत दिशा में अग्रसर हो रही है।
जनप्रतिनिधि (भाजपा और कांग्रेस) की रहस्मयी चुप्पी से जनता में आक्रोश
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चिंताजनक पहलू “वार्ड क्रमांक 20 के कांग्रेस पार्षद रोशन पटेल” का रवैया माना जा रहा है। अपने ही वार्ड की सीमा में सट्टे का साम्राज्य फैलने के बावजूद जनप्रतिनिधि द्वारा साधी गई मौन स्वीकृति स्थानीय निवासियों के गले नहीं उतर रही है।

जब भी इस संवेदनशील मुद्दे पर उनका पक्ष जानने या स्थिति स्पष्ट करने हेतु मीडिया अथवा आम नागरिकों द्वारा उनसे संपर्क करने का प्रयास किया जाता है, तो उनका फोन न उठाना और संवाद से बचना संदेह को और गहरा कर देता है। जनप्रतिनिधि का यह उपेक्षात्मक और निरुत्तरित व्यवहार अब क्षेत्रवासियों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है। वार्ड के नागरिकों का कहना है कि “गांधी के नाम पर वार्ड” – वही “पार्षद भी कांग्रेस पार्टी का”, ऊपर से “चुप्पी?” लोगो में इस बात को लेकर तीव्र असंतोष है कि क्या इस चुप्पी के पीछे कोई मिलीभगत या अनदेखा दबाव है या फिर कानून का क्रियान्वयन केवल कागज़ों तक ही सीमित रह गया है?
नए दबंग थाना प्रभारी से जगी नई उम्मीदें
दल्ली राजहरा के आपराधिक इतिहास पर नज़र डालें तो पूर्व में कई थाना प्रभारी यहाँ आए और स्थानांतरित होकर चले गए, किंतु गांधी चौक के इस अवैध सट्टा कारोबार के चक्रव्यूह को ध्वस्त करने का साहस कोई न दिखा सका। अधिकांश मामलों में आरोपी को महज औपचारिक समझाइश या आंशिक कार्रवाई के बाद छोड़ दिए जाने की आशंका जताई जाती रही है।

हालाँकि, वर्तमान में दल्ली राजहरा थाने की कमान कड़क और दबंग छवि वाले थाना प्रभारी सुनील तिर्की के हाथों में आने के बाद परिदृश्य बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। अपने पदभार ग्रहण के साथ ही उन्होंने अवैध गतिविधियों में लिप्त असामाजिक तत्वों के विरुद्ध ताबड़तोड़ एक्शन शुरू किया हैं, जिससे क्षेत्र के अपराधियों में हड़कंप का माहौल है।
जनता की मांग : कड़ी कार्रवाई और सलाखों के पीछे हो जगह
वार्ड 20 और गांधी चौक के त्रस्त नागरिक अब बेहद उम्मीद भरी निगाहों से नए थाना प्रभारी की ओर देख रहे हैं। आम जनता की यह पुरजोर मांग है कि अवैध सट्टे के इस संगठित सिंडिकेट को केवल कागज़ी चेतावनी न दी जाए, बल्कि मुख्य सूत्रधार “खिलावन साहू और उसके सहयोगियों” पर सख्त कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक इस अवैध सट्टा नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य सरगना को सलाखों के पीछे नहीं पहुँचाया जाएगा, तब तक गांधी चौक को इस सामाजिक बुराई से पूरी तरह मुक्त कराना असंभव होगा।
यदि राजहरा पुलिस इस बार राजनीतिक और सामाजिक दबावों से ऊपर उठकर इस अवैध सट्टा नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में सफल होती है और एक ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम देती है, तो इसका श्रेय निश्चित रूप से दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) “अभिषेक शांडिल्य” एवं बालोद के नए पुलिस अधीक्षक (एसपी) “किरण गंगाराम चव्हाण” के कुशल नेतृत्व को जाएगा।
अब संपूर्ण दल्ली राजहरा शहर की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि कड़क तेवरों वाले नए थाना प्रभारी सुनील तिर्की कब और किस रणनीति के तहत गांधी चौक में फल-फूल रहे सट्टे के खेल का पटाक्षेप करते हैं और “कानून का इकबाल बुलंद करते हैं।”




