मुख्य्मंत्री के सुशासन में हैं सब जायज…हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाकर तोड़ दिए गरीबों के मकान, बिना मुआवजा दिए बनाई सड़क!…

रायगढ़। लैलूंगा तहसील के ग्राम राजपुर में प्रशासनिक तानाशाही और कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का एक बड़ा मामला सामने आया है। पीड़ित राकेश कुमार बेहरा और उनके भाइयों ने अनुविभागीय अधिकारी/भू-अर्जन अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है कि बिना विधिवत भू-अर्जन प्रक्रिया पूरी किए और बिना मुआवजा दिए प्रशासन ने उनके मकान और दुकानों को तोड़कर सड़क का निर्माण कर दिया है।

हाईकोर्ट के आदेश की भी उड़ी धज्जियां – बाकारूमा-लैलूंगा सड़क निर्माण (ए.डी.बी. परियोजना) के तहत प्रभावितों ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम 2013 का पालन न होने पर माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दर्ज की थी।
- हाईकोर्ट का फैसला : याचिका क्रमांक W.P.(C) No. 1827/2021 पर 25 मार्च 2021 को हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि भू-स्वामी को बिना विधिवत भू-अर्जन प्रक्रिया अपनाए और मुआवजा दिए कोई बलपूर्वक कार्रवाई न की जाए।
- प्रशासन की अवमानना : आरोप है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश (कंडिका 03 व 04) के बावजूद प्रशासन ने कोई मुआवजा नहीं दिया और सीधे तौर पर कोर्ट के आदेश की अवमानना की।
दोहरे वार से टूटा पीड़ित परिवार -पीड़ितों की मुख्यमंत्री आबादी पट्टा भूमि (खसरा नं. 263/103) और निजी भूमि (खसरा नं. 380/6, 380/18, 380/19) दोनों पर कार्रवाई की गई:
- वर्ष 2024 में बर्बादी: तहसीलदार लैलूंगा द्वारा वर्ष 2024 में पट्टा भूमि पर बने 7 कमरों के मकान-दुकान को अवैध रूप से ढहा दिया गया, जिससे परिवार की रोजी-रोटी का साधन पूरी तरह खत्म हो गया। यह मामला फिलहाल न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी घरघोड़ा के न्यायालय (प्रकरण क्र. 16/2024) में लंबित है।
- 2026 में जबरन सड़क निर्माण: 11 जुलाई 2026 को तहसीलदार द्वारा सीमांकन के बाद 99 वर्गमीटर में बने 09 कमरों के श्रमिक आवास और 0.132 हेक्टेयर भूमि को सड़क निर्माण की जद में ले लिया गया।
पीड़ितों की मांग: तत्काल मिले उचित मुआवजा
पीड़ित राकेश कुमार बेहरा, मुकेश कुमार बेहरा और सोमेश कुमार बेहरा ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी अधिग्रहित भूमि और बुलडोजर से ध्वस्त किए गए मकानों व दुकानों का तात्कालिक रूप से विधिवत मुआवजा प्रदान किया जाए। यदि प्रशासन जल्द ही मुआवजा जारी नहीं करता, तो मामला पुनः अवमानना याचिका के तहत उच्च न्यायालय तक पहुंचेगा।




