बलौदाबाजार-भाटापारा

गड़े धन के लिए 21 नरबलि का खौफनाक प्लान : 3 महीने में 8 रहस्यमयी मौतों से दहला कसडोल!…

बलौदाबाजार।  जिले के कसडोल स्थित खर्वे गांव इन दिनों एक खौफनाक रहस्य के साये में जी रहा है। महज तीन महीनों के भीतर 8 लोगों की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। गांव में पसरा सन्नाटा और खौफ इस बात की गवाही दे रहा है कि यह सिर्फ मौतों का सिलसिला नहीं, बल्कि गड़े धन, तंत्र-मंत्र और नरबलि की एक बेहद गहरी साजिश हो सकती है।

लगातार हो रही मौतों के बाद जब ग्रामीण पुलिस तक पहुंचे, तो कब्र में दफन 7 शवों को बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। अब पूरे गांव की सांसें फॉरेंसिक रिपोर्ट पर अटकी हैं।

मौत का खौफनाक सिलसिला (6 फरवरी – 14 मई) – गांव में मौतों का जो तांडव शुरू हुआ, उसने किसी को नहीं बख्शा। गांव में शांति पूजा कराने वाले बैगा से लेकर सामाजिक कार्यकर्ता तक इसका शिकार हुए। शांति पूजा में दी गई 3 बकरों, 1 सुअर और मुर्गों की बलि भी मौतों के इस सिलसिले को रोक नहीं पाई।

  • 6 फरवरी : बद्री पटेल
  • 20 फरवरी: बुढालू साहू
  • मार्च: बुधराम जायसवाल (12), छत्तूराम साहू (20), विनोद साहू (31)
  • अप्रैल : गजानंद मांझी (28), चैतूराम साहू (29)
  • 14 मई : महेतरू साहू

21 नरबलि का टारगेट और ‘मौत की शराब’ – ग्रामीणों का सीधा और सनसनीखेज आरोप है कि गड़ा धन हासिल करने के लिए 21 लोगों की बलि देने की तैयारी थी। 8 लोग इस साजिश का शिकार हो चुके हैं और 13 अभी भी टारगेट पर थे।

इस पूरी खौफनाक कहानी के केंद्र में है गांव के मुख्य गुड़ी चौक का दुकानदार रामसहाय जायसवाल। मृतकों के परिजनों (कामता प्रसाद और अन्य) का दावा है कि रामसहाय ने ही इन सभी को अलग-अलग समय पर शराब पिलाई थी। शराब पीने के कुछ देर बाद ही सभी की तबीयत बिगड़ी और उन्होंने दम तोड़ दिया।

गजानंद मांझी की मौत : गांव में शांति पूजा कराने वाले गजानंद मांझी की मौत सबसे ज्यादा चर्चा में है। उनकी पत्नी साधिन बाई के मुताबिक, मोहनलाल जायसवाल (रामसहाय के कहने पर) शराब लेकर आया था। कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर शराब पीने के चंद मिनटों बाद ही गजानंद गिर पड़े और अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

कार्तिक के बयान से हुआ सबसे बड़ा पर्दाफाश – इस अंधेरी साजिश में पहली रोशनी तब आई जब कार्तिक कुम्हार मौत के मुंह से जिंदा लौट आया। 14 अप्रैल को प्रमोद साहू (जिसे रामसहाय ने शराब दी थी) ने कार्तिक को वही शराब पीने दी। कार्तिक के मुताबिक:

  • ​शराब का स्वाद बेहद कड़वा और असामान्य था।
  • ​पीते ही पेट में भयानक दर्द हुआ, उल्टियां हुईं और वह बेहोश हो गया। कार्तिक के इस बयान ने ग्रामीणों के शक को यकीन में बदल दिया और रामसहाय जायसवाल जांच के घेरे में आ गया।

कब्र से निकाले गए शव, क्या खुलेगा राज? –  खर्वे गांव के ग्रामीण कबीर पंथ को मानते हैं, इसलिए उन्होंने शवों को जलाया नहीं बल्कि दफनाया था। पुलिस ने अब 7 शवों को कब्र से खोदकर बाहर निकाला है।

पुलिस और आरोपी पक्ष का क्या कहना है?

  • रामसहाय का बेटा रुद्रेश्वर : “मेरे पिता पर लगे आरोप निराधार हैं। मोबाइल जब्त हो चुका है और हम जांच में सहयोग कर रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ही सच बताएगी।”
  • एसडीओपी के.के. वासनिक : “7 शवों का पीएम और फॉरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

​फिलहाल, रामसहाय के परिवार का पूरे गांव ने बहिष्कार कर दिया है और उसकी दुकान पर ताला लटक रहा है। खर्वे गांव की मिट्टी में अभी भी वह खौफ दफन है, जिसका सच केवल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ही बाहर ला सकती है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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