RM24 की खबर का प्रचंड असर : 48 घंटे में प्रशासन का दूसरा बड़ा प्रहार, अब ‘माँ भगवती मेडिकल स्टोर’ का लाइसेंस निलंबित….

जशपुर …। सरकारी सब्सिडी वाले ‘भारत यूरिया’ पर किसानों से खुलेआम लूट, बिना पक्के बिल के अवैध नकद वसूली और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले सिंडिकेट पर RM24 की खोजी रिपोर्ट का बड़ा और असरदार प्रभाव देखने को मिला है। खबर प्रसारित होने के बाद नींद से जागे प्रशासनिक महकमे ने 48 घंटे के भीतर दूसरी बड़ी और कड़ी कार्रवाई करते हुए हड़कंप मचा दिया है।

किसानों से ₹266.50 एमआरपी (MRP) वाली ‘भारत यूरिया’ खाद की बोरी पर ₹450 से ₹500 तक वसूले जा रहे थे। धीरज अग्रवाल द्वारा दिए गए शिकायत पत्र और किसानों के बयानों के आधार पर RM24 ने बिना पक्के बिल के नकदी के खेल और इस पूरी धांधली को प्रमुखता से उजागर किया था। खबर सामने आते ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और जांच के आदेश जारी किए गए।
‘माँ भगवती मेडिकल स्टोर’ पर गिरी गाज – जशपुर जिले के बिलडगी (पत्थलगांव) स्थित ‘माँ भगवती मेडिकल स्टोर’ पर प्रशासनिक जांच की आंच पहुंची।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार:

- औचक निरीक्षण: औषधि निरीक्षक योगेश कुमार परस्ते ने प्राप्त शिकायतों के आधार पर 03 अगस्त 2026 को मेडिकल स्टोर का बारीकी से निरीक्षण किया।
- नियमों का उल्लंघन : हालांकि जांच में मरीजों का इलाज करने, इंजेक्शन लगाने या सलाइन चढ़ाने के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले, लेकिन मेडिकल स्टोर के रिकॉर्ड, दस्तावेजों और संचालन व्यवस्था में Drugs & Cosmetics Rules, 1945 के Rule 65 के उपनियम 65(3)(2), 65(6) और 65(16) का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया।
- लाइसेंस निलंबित : संचालक से मांगा गया स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने पर सक्षम प्राधिकारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मेडिकल स्टोर का ड्रग लाइसेंस 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया।
48 घंटे में दो बड़े प्रशासनिक फैसले – पहले यूरिया खाद विक्रेताओं पर जांच की चाबुक और अब 48 घंटे के भीतर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलंबन—प्रशासन के इन ताबड़तोड़ फैसलों से अवैध मुनाफाखोरी करने वालों में दहशत का माहौल है।
RM24 की पैनी नजर: अब आगे क्या? – स्थानीय ग्रामीणों और किसानों ने RM24 की निडर पत्रकारिता की सराहना की है। हालांकि, इस बड़ी कार्रवाई के बाद भी कई अहम सवाल कायम हैं:
- क्या किसानों से अधिक दर पर वसूली करने वाले मुख्य आरोपियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज होगी?
- क्या बिना पक्के बिल के लेन-देन करने वाले अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कानूनी शिकंजा कसेगा?
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। RM24 जनहित के इस मुद्दे पर हर पल अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।




