बिलासपुर में ‘ब्लैक डायमंड’ का काला खेल बेनकाब : हाई-ग्रेड कोयले में मिलावट करने वाला माफिया गिरफ्तार, खनिज विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल!…

बिलासपुर। जिले में लंबे समय से चल रहे कोयले के काले कारोबार और संगठित लूट पर आखिरकार पुलिस का भारी हथौड़ा चला है। खदानों से निकलने वाले बेशकीमती ‘हाई-ग्रेड’ कोयले को रातों-रात रास्ते में ही ‘कचरे’ में तब्दील करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने मिलावटखोरी के सरगना और कोल डिपो संचालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, माफिया के गुर्गों द्वारा शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी देने के मामले में भी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक रंगदार को दबोचा है।
मुख्य अंश (Key Highlights) :
- मास्टरमाइंड गिरफ्तार : कोयले में मिलावट और चोरी के मुख्य आरोपी कोल डिपो संचालक राम कुमार आर्य को भेजा गया जेल।
- क्वालिटी से खिलवाड़ : 5500-5800 GCV का उच्च गुणवत्ता वाला कोयला प्लांट पहुंचते ही 4200 GCV का हो गया।
- माफिया का खौफ : शिकायतकर्ता को धमकाने और रंगदारी मांगने वाला अश्वनी साहू भी पुलिस की गिरफ्त में।
- सफेदपोशों पर शक : बिना खनिज विभाग की मिलीभगत के कैसे चल रहा था कोयला चोरी का इतना बड़ा नेटवर्क?
रास्ते में ‘सोना’ कैसे बन गया ‘मिट्टी’? – यह पूरा फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब पेंड्रा निवासी ट्रांसपोर्टर आशीष केशरी ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। एसईसीएल (SECL) की रामपुर खदान से जी-6 श्रेणी का बेहतरीन गुणवत्ता (5500-5800 GCV) वाला कोयला दो ट्रेलरों में भरकर ब्रज आयरन एंड स्टील लिमिटेड, डिघोरा के लिए निकाला गया था। लेकिन, जब यह कोयला प्लांट पहुंचा और लैब में इसकी टेस्टिंग हुई, तो प्रबंधन के होश उड़ गए।
ट्रेलर में भरा कोयला महज 4203 और 4220 GCV का निकला। साफ था कि रास्ते में ही असली कोयला पार कर दिया गया और उसमें घटिया क्वालिटी का पत्थर या डस्ट मिला दिया गया।
दबिश, जांच और सलाखों के पीछे माफिया – हिरीं थाना प्रभारी दामोदर मिश्रा की टीम ने बिना वक्त गंवाए मामले की जांच शुरू की। ड्राइवर से पूछताछ में हिरीं क्षेत्र के एक कोल डिपो का नाम सामने आया। पुलिस ने मौके पर धावा बोला, यार्ड का पंचनामा किया और सैंपलिंग कराई। जांच में डिपो संचालक राम कुमार आर्य की गर्दन फंस गई। पुलिस के मुताबिक, यह आरोपी लंबे समय से कोयला चोरी और मिक्सिंग के इस अवैध धंधे में लिप्त था। पुख्ता सबूतों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर सीधा जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया।
खौफ का सिंडिकेट : शिकायतकर्ता को मिली मौत की धमकी – कोयला माफिया का दुस्साहस यहीं खत्म नहीं हुआ। अपने काले साम्राज्य पर पुलिस की नजर पड़ते ही, उन्होंने शिकायतकर्ता को डराने-धमकाने का पैंतरा चला। केस वापस लेने का दबाव बनाया गया और सरेआम जान से मारने की धमकियां दी गईं।
एसएसपी रजनेश सिंह और एएसपी मधुलिका सिंह ने इस रंगदारी को गंभीरता से लिया और एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस ने घेराबंदी कर बिल्हा निवासी अश्वनी कुमार साहू को धर दबोचा। पूछताछ में उसने कबूला कि वह एक ट्रांसपोर्टर का भाई है और कोयला कारोबारियों के इशारे पर ही वह शिकायतकर्ता की आवाज दबाने पहुंचा था।
खनिज विभाग के निकम्मेपन पर उठे सवाल: क्या चल रहा है ‘कमीशन का खेल’? – इस पूरी कार्रवाई ने बिलासपुर में खनिज विभाग (Mineral Department) की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। जानकारों का सीधा आरोप है कि बिना अफसरों की मिलीभगत के कोयले की इतनी बड़ी अफरातफरी संभव ही नहीं है।
कोल डिपो के लाइसेंस बांटने और उनकी जांच का जिम्मा खनिज विभाग का है, लेकिन अफसर सिर्फ कागजी खानापूर्ति और एसी कमरों तक सीमित हैं। सवाल यह है कि:
- क्या खनिज अफसर इस मिलावटखोरी से अनजान हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं?
- जिले भर में चल रहे इन अवैध ‘मिक्सिंग यार्ड्स’ पर अब तक खनिज विभाग ने खुद से कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की?
पुलिस की इस सर्जिकल स्ट्राइक से कोयला माफिया में हड़कंप मच गया है, लेकिन अब देखना यह है कि प्रशासन इस गठजोड़ की जड़ों तक कब पहुंचता है और खनिज विभाग के ‘सफेदपोश’ अफसरों पर कब गाज गिरती है!


