छत्तीसगढ़ में ‘समानता’ का नया अध्याय; साय कैबिनेट ने दी UCC को हरी झंडी…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेश की कानूनी और सामाजिक संरचना को बदलने की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और गुजरात के बाद उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की अवधारणा को धरातल पर उतार रहे हैं।
जस्टिस रंजना देसाई समिति : ड्राफ्टिंग का ब्लूप्रिंट – सरकार ने निर्णय लिया है कि UCC का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति को सौंपी जाएगी।
- जन-भागीदारी : यह समिति केवल बंद कमरों में कानून नहीं बनाएगी, बल्कि प्रदेश के सुदूर बस्तर से लेकर सरगुजा तक के आम नागरिकों, विभिन्न जनजातीय समूहों, धार्मिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों से सुझाव लेगी।
- विधानसभा का मार्ग : कमेटी की रिपोर्ट और ड्राफ्ट मिलने के बाद, सरकार इसे एक विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश करेगी।
आखिर क्यों है UCC की आवश्यकता? – वर्तमान में भारत (और छत्तीसगढ़) में व्यक्तिगत मामले जैसे – शादी, तलाक, गोद लेना और उत्तराधिकार – संबंधित व्यक्ति के धर्म के आधार पर तय होते हैं। सरकार के अनुसार इसके तीन मुख्य प्रभाव पड़ेंगे:
- न्याय में एकरूपता : अभी अलग-अलग पर्सनल लॉ (जैसे शरियत एक्ट 1937 या हिंदू मैरिज एक्ट) होने से अदालतों को जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। UCC इसे सरल बनाएगा।
- लैंगिक समानता : कई पर्सनल लॉ में महिलाओं के अधिकार सीमित हैं। UCC के आने से पैतृक संपत्ति और तलाक जैसे मामलों में महिलाओं को पुरुषों के बराबर खड़ा किया जा सकेगा।
- सामाजिक समरसता : कानून के सामने हर नागरिक की पहचान ‘धार्मिक’ होने के बजाय ‘संवैधानिक’ होगी।
उत्तराखंड मॉडल की झलक : क्या बदलेंगे नियम? – छत्तीसगढ़ में लागू होने वाले संभावित कानून के केंद्र में वे 5 मुख्य बिंदु होंगे जो पहले ही देश में चर्चा का विषय बने हुए हैं:
- विवाह का अनिवार्य पंजीकरण : किसी भी धर्म के अनुसार हुई शादी का 60 दिनों के भीतर सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर ₹20,000 तक का जुर्माना लगेगा।
- लिव-इन रिलेशनशिप पर लगाम : लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को जिला प्रशासन के पास पंजीकरण कराना होगा। पहचान छिपाने या गलत जानकारी देने पर जेल की सजा का प्रावधान होगा।
- बेटियों को बराबरी का हक : संपत्ति के बंटवारे में अब बेटों की तरह बेटियों का भी जन्मसिद्ध अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।
- बहुविवाह पर रोक : सभी समुदायों के लिए एक पत्नी/एक पति का नियम कड़ाई से लागू होगा।
शरियत कानून और मौजूदा स्थिति – भारत में 1937 से लागू मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लीकेशन एक्ट के तहत मुस्लिम समाज के निजी फैसले लिए जाते हैं।
विशेष नोट: UCC के आने से केवल सिविल (निजी) कानून बदलेंगे। आपराधिक कानून (जैसे चोरी या हत्या की सजा) पूरे देश में पहले से ही सभी के लिए एक समान हैं। विवाद अक्सर महिलाओं के उत्तराधिकार और गुजारा भत्ता (Maintenance) को लेकर होता है, जिसे UCC पूरी तरह से ‘जेंडर न्यूट्रल’ बना देगा।
राष्ट्रीय परिदृश्य –
- गोवा : पुर्तगाली शासन के समय (1867) से ही यहाँ UCC लागू है।
- उत्तराखंड : 28 जनवरी 2025 को कानून लागू कर आधुनिक भारत का पहला राज्य बना।
- गुजरात : हाल ही में (मार्च 2026) विधानसभा में विधेयक पारित कर अपनी मंशा साफ कर चुका है।
राजनीतिक और सामाजिक मायने – छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल राज्य है। जानकारों का मानना है कि UCC के ड्राफ्ट में आदिवासी परंपराओं और रूढ़ियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है, ताकि उनकी विशिष्ट पहचान प्रभावित न हो। सरकार का यह कदम आगामी चुनावों और राज्य की प्रशासनिक साख के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




