बिलासपुर

पत्नी ने छिपाई पीरियड्स न आने की बीमारी, कोर्ट ने माना ‘मानसिक क्रूरता’ ; तलाक पर लगाई मुहर, मिला 5 लाख का हर्जाना…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि शादी से पहले जीवनसाथी से गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छिपाना ‘मानसिक क्रूरता’ (Mental Cruelty) के दायरे में आता है। हाईकोर्ट की जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि इस रिश्ते में अब सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है। हालांकि, पति को आदेश दिया गया है कि वह चार महीने के भीतर पत्नी को एकमुश्त 5 लाख रुपये भरण-पोषण के रूप में दे।

क्या था ’10 साल’ का वह राज? – मामला कवर्धा का है। पति ने कोर्ट को बताया कि शादी के कुछ समय बाद जब पत्नी ने माहवारी (Periods) रुकने की शिकायत की, तो वह उसे डॉक्टर के पास ले गया। वहां जो सच सामने आया, उसने पति के होश उड़ा दिए। मेडिकल जांच में खुलासा हुआ कि पत्नी पिछले 10 साल से पीरियड्स न आने की समस्या से जूझ रही थी और उसे गर्भधारण में गंभीर समस्याएं थीं।

​सबसे चौंकाने वाली बात पत्नी का कबूलनामा था। उसने स्वीकार किया कि यदि वह यह बात शादी से पहले बता देती, तो पति शादी से इनकार कर देता, इसलिए उसने जानबूझकर यह सच छिपाया। पति ने इसे विश्वासघात और मानसिक क्रूरता बताया।

“क्या अनाथालय खोल रखा है?” – 5 जून 2015 को हुई इस शादी में सिर्फ बीमारी ही नहीं, बल्कि व्यवहार भी दरार की वजह बना। पति का आरोप था कि पत्नी घर के बुजुर्ग माता-पिता और भतीजे-भतीजियों की देखभाल करने पर भड़क जाती थी। उसका कहना था, “क्या अनाथालय खोल रखा है?” वह घर का खाना बनाने से मना करती थी और छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करती थी।

40 हजार के लिए अन्न-जल त्याग : रिश्ते में कड़वाहट का एक बड़ा कारण पैसों का विवाद भी बना। पति का आरोप है कि पत्नी के भाई ने उससे 40 हजार रुपये मांगे थे। जब उसने पैसे देने से मना किया, तो पत्नी ने उससे बात करना और खाना-पीना बंद कर दिया। मजबूर होकर पति को साले के खाते में रकम ट्रांसफर करनी पड़ी।

पत्नी की दलील: ‘बांझ’ कहकर प्रताड़ित किया : वहीं, पत्नी ने अपने बचाव में कहा कि उसकी मेडिकल समस्या अस्थायी थी, जो दवा और योग से ठीक हो सकती थी। उसने आरोप लगाया कि दहेज में एसी, फ्रिज, गहने सब कुछ देने के बाद भी उसे ‘बांझ’ कहकर ताने मारे जाते थे। घर की नौकरानी को हटाकर उससे नौकरों जैसा काम कराया जाता था।

कोर्ट का निष्कर्ष : हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि विश्वास की कमी और आपसी कलह के कारण अब साथ रहना संभव नहीं है। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के डिक्री को बरकरार रखते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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