जंगलों में सागौन तस्करी का काला खेल : तांदुला नदी से 21 गोले जब्त, बालोद वन विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के घने जंगलों पर लकड़ी माफियाओं की नजरें तीखी हो चुकी हैं। फिल्म ‘पुष्पा’ की तर्ज पर सागौन के बेशकीमती पेड़ों की अवैध कटाई कर उन्हें नदी के रास्ते तस्करी करने का सिलसिला जोर पकड़ चुका है। 15 जनवरी को मर्रामखेड़ा के पास तांदुला नदी में सागौन के 21 नग गोले बरामद होने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों की सूचना पर कार्यवाही हुई, लेकिन विभागीय लापरवाही के आरोप तेज हो गए हैं।

जिले के ग्रामीणों ने अचानक देखा, जब उन्हें पानी के बीच बहते सागौन की लकड़ी के गोले दिखे। मर्रामखेड़ा क्षेत्र में बड़ी मात्रा में सागौन के लट्ठे अटक गए थे। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। विभाग की टीम ने नदी से ये मूल्यवान गोले बाहर निकाले और जब्त कर लिए। वन विभाग के डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि जांच तेजी से चल रही है। दोषी तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
विभागीय लापरवाही पर सवाल
जिस बीट क्षेत्र से यह तस्करी का माल मिला, वहां के बीट गार्ड की जिम्मेदारी तय की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि घटनास्थल का सघन निरीक्षण कर कटे पेड़ों की जड़ों से गोले का मिलान किया जाएगा। यदि लापरवाही साबित हुई, तो संबंधित बीट गार्ड पर विभागीय दंडात्मक कार्यवाही होगी। डीएफओ ने जंगल की निगरानी में चूक बर्दाश्त न करने का भरोसा दिलाया।

डौंडी रेंज में हुआ था सागौन कटाई का खुलासा
यह पहला मामला नहीं है। जिले के डौंडी रेंज के बिटेझर इलाके में भी सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, कटी लकड़ी से आलीशान फर्नीचर तैयार करने का धंधा चल रहा था। जिसमें डौंडी रेंज के रेंजर जीवनलाल भोंडेकर द्वारा अवैध सागौन से निजी फर्नीचर बनवाने के आरोप लगे हैं। वन विभाग ने इसकी अलग से जांच शुरू कर दी है। लगातार उजागर हो रही इन घटनाओं ने जिला वन विभाग की विश्वसनीयता पर बट्टा लगाया है।
कर्मचारियों पर फेरबदल की तैयारी
बार-बार शिकायतें मिलने से उच्चाधिकारियों में असंतोष व्याप्त है। जिले में एक ही स्थान पर लंबे समय से तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों का स्थानांतरण किया जा सकता है। “ग्रामीणों और गुप्त सूत्रों का दावा है कि बालोद रेंजर रामनाथ टेकाम सहित वनकर्मी अब जंगलों में पेट्रोलिंग करते दिखाई ही नहीं देते। उन्होंने अनुमान लगाया है कि वे जंगलों में गश्त के बजाय कार्यालयों या आवासों में स्मार्टफोन पर रील्स देखने में व्यस्त रहते हैं।” मतलब कि बालोद वन विभाग के कर्मचारी और जिम्मेदार अधिकारी जंगलों में दिखाई ही नहीं देते। साफ जाहिर है कि इसी लापरवाही से तस्करों का मनोबल बढ़ा है और धड़ल्ले से सागौन व अन्य कीमती प्रजातियों की तस्करी हो रही है। वन विभाग का खौफ खत्म हो चुका है, जिससे जंगलों का संरक्षण संकट में है।
हो सकता है सख्ती का ऐलान
डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि “अब निगरानी को मजबूत किया जाएगा। ड्रोन सर्वे और गश्ती दल बढ़ाए जाएंगे।”

ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील की गई है। जंगल संरक्षण के लिए अब समुदाय-विभाग संयुक्त प्रयास जरूरी हैं। यदि ऐसी तस्करी पर अंकुश न लगा, तो बालोद के प्राकृतिक संसाधन चरमरा सकते हैं। जिला प्रशासन को भी इस दिशा में हस्तक्षेप करना होगा।
मर्रामखेड़ा तांदुला नदी में सागौन का 21 गोला मिला है, जिसे जब्त किया गया है। देखने से मशीन से काटना प्रतीत हो रहा है। मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
अभिषेक अग्रवाल
वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) बालोद




