विशेष रिपोर्ट : रायगढ़ के जंगलों में ‘समानांतर कोयला खदान’ का भंडाफोड़; क्या सफेदपोशों के इशारे पर हो रहा था काला खेल?…

रायगढ़। जिले के धरमजयगढ़ अंतर्गत बोरो क्षेत्र में चल रहे अवैध कोयला खनन के एक बड़े नेटवर्क पर प्रशासन ने सर्जिकल स्ट्राइक की है। 3 फरवरी 2026 को पुलिस, वन और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने बोरो के जंगलों में दबिश देकर एक ‘चैन माउंटेन मशीन’ (पोकलेन) को जब्त किया। लेकिन इस कार्रवाई ने प्रशासन की सफलता से ज्यादा माफिया की गहरी पैठ और सूचना तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झारखंड-बंगाल की तर्ज पर चल रही थी अवैध खदान : ताजा जानकारी के अनुसार, बोरो और आसपास के क्षेत्रों में माफियाओं ने बाकायदा पोकलेन मशीनों का इस्तेमाल कर ‘समानांतर कोयला खदान’ खोल रखी थी। मौके से करीब 50 टन कोयला भी बरामद किया गया है। यह खनन किसी छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि संगठित गिरोह द्वारा एक सुनियोजित साजिश के तहत किया जा रहा था। यहाँ चंद मीटर की खुदाई पर ही कोयला निकल आता है, जिसका फायदा उठाकर माफिया रातों-रात सरकारी संपदा को लूट रहे थे।
कार्रवाई से पहले ‘टिप्स’ और गायब हुई जेसीबी – छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से भारी-भरकम चैन माउंटेन मशीन तो जब्त की, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि कार्रवाई शुरू होने से ठीक पहले वहाँ मौजूद जेसीबी मशीन को हटा लिया गया। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों की मानें तो माफिया के ‘मुखबिर तंत्र’ ने उन्हें अधिकारियों के आने की पूर्व सूचना दे दी थी। सवाल उठता है कि क्या विभाग के भीतर से ही किसी ‘विभीषण’ ने माफिया को अलर्ट किया?
ग्रामीणों की शिकायत और प्रशासन की ‘देरी’ – बोरो क्षेत्र के ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि भारी मशीनों की गड़गड़ाहट से पूरी रात इलाका गूंजता रहता था। ग्रामीणों ने कई बार अवैध खनन और मशीनों की आवाजाही की शिकायत की थी। स्थानीय पत्रकारों और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जब दबाव बढ़ा, तब जाकर प्रशासन ने यह संयुक्त कार्रवाई की।
अब तक क्यों नहीं हुई ‘सफेदपोशों’ की पहचान? – रायगढ़ जिला लंबे समय से कोयला माफियाओं का गढ़ रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि इतनी बड़ी मशीनें बिना किसी बड़े संरक्षण के जंगल के बीचों-बीच नहीं पहुंच सकतीं। अब तक न तो मशीन के असली मालिक का नाम सार्वजनिक किया गया है और न ही उन “सफेदपोशों” का चेहरा सामने आया है जो इस अवैध साम्राज्य को संरक्षण दे रहे हैं।
क्या कहती है पुलिस और खनिज विभाग? – खनिज निरीक्षक आशीष गढ़पाले और प्रशासन की टीम का कहना है कि मामला अत्यंत गंभीर है और इसकी विस्तृत जांच जारी है। जब्त पोकलेन को पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही मशीन मालिकों और इस अवैध नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल : क्या प्रशासन केवल मशीन जब्त करके “कर्तव्य इतिश्री” कर लेगा या इस काले कारोबार के असली ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुंच पाएगा? ग्रामीणों को डर है कि अगर कार्रवाई यहीं रुक गई, तो कुछ दिनों बाद फिर से मशीनों की आवाज गूंजने लगेगी।




