मीडिया के खुलासे के बाद हड़कंप : फर्जी नियुक्ति पत्र के सहारे नौकरी कर रहे असिस्टेंट ग्रेड-3 कर्मचारी को जिला शिक्षा अधिकारी ने किया बर्खास्त…

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई। शिक्षा विभाग में फर्जी नियुक्तियों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) खैरागढ़ ने ‘फर्जी नियुक्ति पत्र’ के आधार पर सरकारी सेवा का लाभ ले रहे सहायक ग्रेड-03 श्री टीकम चंद साहू को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत की गई है।

खबर के मुख्य बिंदु :
- मीडिया के खुलासे से हड़कंप : 12 अगस्त 2025 को समाचार पत्रों में “दो जिलों में फैला फर्जी नियुक्ति का नेटवर्क” शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग की नींद खुली थी।
- जांच में खुली पोल : राज्य शिक्षा आयोग (रायपुर) से जब टीकम चंद साहू के नियुक्ति आदेश (क्रमांक 2019-20/34) का सत्यापन कराया गया, तो आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश उनके कार्यालय से जारी ही नहीं हुआ है।
- हस्ताक्षर और सील भी फर्जी : जांच में पाया गया कि नियुक्ति पत्र पर तत्कालीन सचिव डॉ. ओ.पी. मिश्रा के जो हस्ताक्षर थे, वे उनके असली हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते। यानी पूरा नियुक्ति पत्र ही कूटरचित (Forged) था।
- सफाई में नहीं दे पाए कोई सबूत : विभाग द्वारा कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था, लेकिन वे कोई भी प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके जो उनकी नियुक्ति को वैध साबित कर सके।
कठोर कार्रवाई के संकेत : जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश (क्रमांक/9844/सतर्कता/2025-26) में स्पष्ट लिखा गया है कि श्री साहू द्वारा प्रस्तुत नियुक्ति पत्र पूर्णतः फर्जी और कूटरचित है। इसे गंभीर अपराध मानते हुए उन्हें सेवा से पृथक कर दिया गया है।
इस कार्रवाई की प्रतिलिपि कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और राज्य शिक्षा आयोग को भी भेजी गई है, जिससे आने वाले दिनों में आरोपी के खिलाफ एफआईआर (FIR) और आपराधिक मामला दर्ज होने की भी पूरी संभावना है।
प्रशासन की चेतावनी: इस बड़ी कार्रवाई ने विभाग के उन अन्य कर्मचारियों में भी खलबली मचा दी है जो संदिग्ध दस्तावेजों के सहारे सिस्टम में पैठ बनाए हुए हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार और जालसाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




