रानीझाप की बेटी के सम्मान में उतरा नारी शक्ति का सैलाब; प्रशासन को अल्टीमेटम – “न्याय में देरी, अन्याय के समान”…

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | विशेष रिपोर्ट रानीझाप क्षेत्र में घटित अमानवीय कृत्य ने न केवल जिले को बल्कि पूरे प्रदेश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। इस शर्मनाक घटना के खिलाफ अब जन-आक्रोश फूट पड़ा है। पीड़िता को न्याय दिलाने और अपराधियों को कठोरतम दंड दिलाने के संकल्प के साथ महिला कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है।
कलेक्टर-SP कार्यालय का घेराव : गूंजी न्याय की हुंकार – महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन की संभागाध्यक्ष श्रीमती विद्या राठौर के नेतृत्व में दर्जनों महिला नेत्रियों ने जिला कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपनी ताकत दिखाई। प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए ज्ञापन में संगठनों ने सीधे तौर पर पुलिसिया कार्रवाई की गति और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

श्रीमती राठौर ने दो टूक शब्दों में कहा, “यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि हमारी सामाजिक सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। जब तक दोषियों को उनके किए की सजा नहीं मिल जाती, हम चैन से नहीं बैठेंगे।”
मानवाधिकार एसोसिएशन की बड़ी पहल : ‘समानांतर जांच’ का ऐलान – मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। श्रीमती विद्या राठौर द्वारा 5 सदस्यीय विशेष जांच दल (Special Investigation Team) का गठन किया गया है।
इस निजी जांच दल की भूमिका :
- तथ्यों का संकलन: यह दल जमीनी स्तर पर जाकर वास्तविक तथ्यों और साक्ष्यों को एकत्रित करेगा।
- पीड़िता को संबल: दल पीड़िता और उसके परिवार से सीधा संवाद कर उन्हें सुरक्षा और मानसिक ढांढस बंधाएगा।
- प्रशासनिक तालमेल: जांच में मिलने वाले अहम सुरागों को लिखित रूप में कलेक्टर और एसपी को सौंपा जाएगा ताकि पुलिस गुमराह न हो सके।
सर्वांगीण सहायता की मांग : “कानूनी हक से मेडिकल रिलीफ तक” – ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के सामने चार सूत्रीय अनिवार्य मांगें रखी गई हैं :
- सुरक्षा कवच : पीड़िता को तत्काल उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रदान की जाए।
- विशेषज्ञ परामर्श : घटना के सदमे (Trauma) से उबारने के लिए सर्वश्रेष्ठ मनोवैज्ञानिकों द्वारा काउंसलिंग।
- फास्ट ट्रैक ट्रायल : मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर रिकॉर्ड समय में फैसला सुनाया जाए।
- आर्थिक सहायता : पीड़िता के पुनर्वास के लिए शासन स्तर पर त्वरित आर्थिक मदद।
नारी शक्ति का एकजुट स्वर : इस विरोध प्रदर्शन में शहाना बेगम (प्रदेश अध्यक्ष, प्रियंका गांधी संगठन) और श्रीमती रेखा तिवारी (जिलाध्यक्ष, महिला मजदूर कांग्रेस) ने भी तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि “बेटी बचाओ” का नारा तब तक खोखला है जब तक अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
संपादकीय टिप्पणी : वक्त आ गया है कड़े संदेश का – रानीझाप की घटना यह याद दिलाती है कि समाज में अभी भी ऐसे दरिंदे मौजूद हैं जो कानून और मानवता का डर भूल चुके हैं। विद्या राठौर और उनके साथ खड़ी महिला शक्तियों ने आज यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी चाहे कोई भी हो, उसे समाज और कानून के कटघरे में खड़ा होना ही पड़ेगा। प्रशासन की परीक्षा अब शुरू होती है।



