बलरामपुर नगरपालिका में ‘महाभारत’ : पार्षद ने खोला CMO के खिलाफ मोर्चा, वायरल ऑडियो और AI टेंपरिंग के दावों से गरमाई सियासत…

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर नगरपालिका में इन दिनों व्यवस्था और सत्ता के बीच का टकराव सड़क पर आ गया है। प्रशासनिक हनक और जनप्रतिनिधियों के मान-सम्मान की इस लड़ाई ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। भाजपा पार्षद द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) प्रणव राय के खिलाफ जारी किए गए एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग ने जिले के राजनीतिक गलियारों में भूकंप ला दिया है।

आरोप : ‘अभद्र भाषा और धमकी की राजनीति’ – वार्ड क्रमांक 14 के भाजपा पार्षद गौतम सिंह ने CMO पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। पार्षद का दावा है कि CMO प्रणव राय न केवल जनप्रतिनिधियों से अभद्र व्यवहार करते हैं, बल्कि काम के बदले धमकियों का सहारा लेते हैं।
“अपनी ही सरकार में हमारी सुनवाई नहीं हो रही। अधिकारी बेलगाम हो चुके हैं और जनहित के कार्यों में बाधा डाल रहे हैं।” – गौतम सिंह, पार्षद
CMO का पलटवार : ‘AI और तकनीक का खेल’ – इधर, आरोपों के घेरे में आए CMO प्रणव राय ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बड़ी साजिश करार दिया है। उन्होंने इस विवाद में ‘AI टेक्नोलॉजी’ का एंगल जोड़ते हुए सनसनी फैला दी है।
- दावा: वायरल ऑडियो पूरी तरह फर्जी है और इसमें AI तकनीक के जरिए छेड़छाड़ (Tampering) की गई है।
- तर्क: नियम विरुद्ध काम करने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है।
- स्टैंड: वे किसी भी अवैध दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और केवल नियमों के दायरे में रहकर विकास कार्य करेंगे।
बड़ा सवाल : सुशासन या अफसरशाही? – यह मामला अब केवल एक कॉल रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं रह गया है। यह सीधे तौर पर ‘सुशासन’ के दावों को चुनौती दे रहा है। अगर ऑडियो असली है, तो एक अधिकारी का जनप्रतिनिधि के प्रति ऐसा व्यवहार अक्षम्य है। और यदि CMO का ‘AI टेंपरिंग’ वाला दावा सही निकलता है, तो यह तकनीक के खतरनाक दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण होगा।
फिलहाल, बलरामपुर नगरपालिका ‘अखाड़ा’ बन चुकी है। एक तरफ कार्रवाई पर अड़े भाजपा पार्षद हैं, तो दूसरी तरफ नियमों का हवाला देते CMO। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस ‘डिजिटल विवाद’ की सच्चाई कब तक सामने लाता है।




