प्रभारी प्रबंधक की लापरवाही से किसानों ने समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाया धान…

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/गुरूर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूरे राज्य में 15 नवंबर से धान की समर्थन मूल्य पर खरीदी आरंभ करने का वादा किया गया था, लेकिन इसी बीच सहकारी सोसायटियों के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले जाने से व्यवस्था में भारी व्यवधान उत्पन्न हो गया। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए वैकल्पिक इंतजाम किए और अन्य विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदारियां सौंपीं, जिससे निर्धारित तिथि पर धान खरीदी की शुरुआत हो सकी। गुरूर विकासखंड के 22 उपार्जन केंद्रों में से 18 में धान खरीदी सुचारु रूप से शुरू हुई, लेकिन तीन केंद्रों में टोकन कटाई न होने से कोई खरीदी नहीं हो सकी, जबकि एक सोसायटी में प्रभारी प्रबंधक की गंभीर लापरवाही के कारण दर्जनों किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने से महरूम रह गए। यह घटना न केवल किसानों की मेहनत पर पानी फेरने वाली है, बल्कि सरकारी वादों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रही है।
प्राप्त सूत्रों के अनुसार, बालोद जिले के गुरूर विकासखंड स्थित सेवा सहकारी समिति, सुर्रा में जिला प्रशासन ने हल्का पटवारी चंद्रहास साहू को प्रभारी प्रबंधक के रूप में तैनात किया था। लेकिन चंद्रहास साहू ने अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए 15 नवंबर को सोसायटी से पूरी तरह गायब रहने का रवैया अपनाया। नतीजतन, पहले से पंजीकृत सात किसानों के कटे हुए टोकन के बावजूद कोई धान खरीदी नहीं हो सकी। ये किसान, जो अपनी फसल को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, इस लापरवाही का शिकार बन गए। खरीदी न होने से उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई, क्योंकि किसानी के व्यस्त समय में संसाधनों की कमी पहले से ही एक बड़ी समस्या है। इस तरह की अनियमितता से न केवल किसानों को तत्काल नुकसान हुआ, बल्कि उनकी आजीविका पर भी गहरा असर पड़ा, जिससे परिवारों में हाहाकार मच गया।

हालांकि, प्रशासन ने वंचित किसानों को आश्वासन दिया है कि वे आगामी दिनों में टोकन में संशोधन कराकर अपनी धान बेच सकेंगे। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह समाधान अस्थायी है, क्योंकि निर्धारित तिथि पर खरीदी न होने से किसानों को बाजार में कम दाम पर फसल बेचने या भंडारण की मजबूरी का सामना करना पड़ सकता है। जो अतिरिक्त नुकसान का कारण बनेगा। इस घटना ने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं, खासकर जब राज्य सरकार किसान कल्याण को प्राथमिकता देने का दावा कर रही है।

मामले की जानकारी मिलते ही अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) गुरूर, रामकुमार सोनकर ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने तहसीलदार के नेतृत्व में एक राजस्व अधिकारियों की जांच टीम गठित करने के निर्देश जारी किए हैं। एसडीएम ने स्पष्ट कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रभारी प्रबंधक के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी, जिसमें अनुशासनात्मक दंड से लेकर विभागीय जांच तक शामिल हो सकती है। किसान संगठनों ने भी इसकी मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या एसडीएम का यह आश्वासन केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाएगा, या वास्तव में न्याय सुनिश्चित होगा? पिछले वर्षों में इसी तरह के मामलों में कार्यवाही की कमी ने किसानों का विश्वास कमजोर किया है।
यह घटना पूरे छत्तीसगढ़ के संदर्भ में एक सबक है। धान खरीदी जैसे महत्वपूर्ण अभियान में कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, वरना सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाएंगी। किसान, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उनकी मेहनत का सम्मान करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट जल्द आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी, ताकि किसानों का भरोसा बहाल हो सके।




