रायगढ़

सड़कों पर मौतों का तांडव रोकने एक्शन मोड में रायगढ़ प्रशासन : 16 ब्लैक स्पॉट पर नकेल, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और ‘गोल्डन ऑवर’ पर कलेक्टर-एसएसपी का कड़ा रुख…

रायगढ़। रायगढ़ की सड़कों पर बेकाबू रफ्तार और अंधाधुंध लापरवाही के चलते लगातार उजड़ रही जिंदगियों पर अब जिला प्रशासन ने सीधा प्रहार करने की ठान ली है। हादसों और मौतों के खौफनाक आंकड़ों को थामने के लिए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशिमोहन सिंह ने साझा रणनीति बनाते हुए जिले में सड़क सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जहां नियमों की अनदेखी करने वालों के लिए कोई ढिलाई नहीं होगी।

​कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित उच्चस्तरीय मैराथन समीक्षा बैठक में स्पष्ट संकेत दिया गया कि अब खानापूर्ति नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस बदलाव दिखना चाहिए।

ब्लैक स्पॉट्स पर फौरन एक्शन, 15 दिनों में रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्लान – कलेक्टर ने जिले के 16 चिह्नित ब्लैक स्पॉट्स के अलावा उन तमाम संवेदनशील जगहों पर तत्काल सुधारात्मक उपाय करने के कड़े निर्देश दिए हैं, जहां अक्सर खून बहता है।

  • 15 दिनों की डेडलाइन : जिले में आधुनिक तकनीक से लैस ‘रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम’ तैयार करने के लिए अधिकारियों को महज 15 दिन का वक्त दिया गया है।
  • इंजीनियरिंग सुधार : दुर्घटना बहुल क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से स्पीड ब्रेकर, स्पष्ट संकेतक बोर्ड और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाने का काम शुरू करने को कहा गया है।
  • विजिबिलिटी क्लीयरेंस : हाईवे से जुड़ने वाली ग्रामीण सड़कों के मुहाने पर विजिबिलिटी बाधा बन रही झाड़ियों, धूल और सोल्डर की समस्याओं को तुरंत दूर किया जाएगा।

शराबियों और बिना हेलमेट चालकों पर नपेगी लगाम – सड़क पर दूसरों की जान जोखिम में डालने वालों को एसएसपी शशिमोहन सिंह ने दो टूक चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराब पीकर स्टीयरिंग या हैंडल थामने वालों के खिलाफ सिर्फ चालान नहीं, बल्कि सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। साथ ही दोपहिया सवारों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने को लेकर जिलेभर में सघन अभियान छेड़ा जाएगा। सभी थाना प्रभारियों और एसडीएम को संयुक्त रूप से मैदान में उतरकर अपने-अपने क्षेत्रों के ‘टॉप-10 डेंजर जोन’ की निगरानी करने का आदेश दिया गया है।

‘गोल्डन ऑवर’ में नहीं थमेगी सांसें, उद्योगों से जुड़ेंगे ‘ट्रैफिक दूत’ – सड़क हादसों में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण समय पर इलाज न मिलना है। बैठक में ‘गोल्डन ऑवर’ को लेकर सख्त व्यवस्था बनाने पर जोर रहा :

  • ​सूचना मिलते ही डायल-112 और एंबुलेंस की त्वरित पहुंच सुनिश्चित की जाएगी ताकि घायल को सीधे विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचाया जा सके।
  • ​औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए उद्योगों के सहयोग से विशेष प्रशिक्षित ‘यातायात मित्र’ (ट्रैफिक दूत) तैनात किए जाएंगे।
  • ​कोतरा रोड आरओबी के नीचे बेतरतीब दोपहिया वाहनों की पार्किंग को व्यवस्थित करने का जिम्मा नगर निगम को सौंपा गया।

​समीक्षा बैठक में सीएसपी मयंक मिश्रा, निगमायुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय, एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो, एएसपी अनिल सोनी और डीएसपी ट्रैफिक उत्तम प्रताप सिंह समेत पुलिस, पीडब्ल्यूडी, नेशनल हाईवे और खनिज विभाग के आला अफसर मौजूद रहे। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सड़कों को ‘मौत का जाल’ बनने से रोकने के लिए अब हर स्तर पर सख्ती बरती जाएगी।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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