छत्तीसगढ़

भ्रष्टाचार का ‘महा-घोटाला’: कागजों पर बह रही विकास की गंगा, पत्थलगांव की कुमेकेला पंचायत में सरपंच-सचिव डकार गए 18 लाख रुपये!….

  • सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बावजूद लीपापोती में जुटा प्रशासन; अधूरे पड़े हैं 16 से ज्यादा काम, फिर भी निकल गए लाखों रुपये।

जशपुर। जिले में ‘भ्रष्टाचार का दीमक’ किस तरह विकास योजनाओं को खोखला कर रहा है, इसका एक जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण पत्थलगांव विकासखंड की ग्राम पंचायत कुमेकेला से सामने आया है। यहाँ के सरपंच और सचिव ने ‘कागजी विकास’ का ऐसा तिलिस्म बुना है कि गांव वालों को बिना बताए, बिना किसी पंचायत बैठक के 15वें वित्त आयोग की लगभग 17 से 18 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि गबन कर ली गई।

​शिकायतकर्ता लोकनाथ और गांव वालों ने जब इस पूरे फर्जीवाड़े के खिलाफ आवाज़ उठाई और सीएम हेल्पलाइन का दरवाज़ा खटखटाया, तो स्थानीय प्रशासन के ‘लीपापोती अभियान’ की भी पोल खुल गई।

फाइलों में बन गई सड़क, कागजों पर बह रहा पानी! – दस्तावेजों और अधूरे कार्यों की जो सूची (वर्ष 2020-21 से 2026-27 तक) सामने आई है, वह पंचायत स्तर पर मची ‘लूट’ की गवाही दे रही है। जिन कामों के लिए लाखों रुपये निकाले गए, वे धरातल पर या तो अधूरे हैं या शुरू ही नहीं हुए। जरा इन आंकड़ों पर नज़र डालिए:

  • नाली निर्माण (प्रहलाद घर से हेता घर तक, 2020-21): 5 लाख की राशि में से 2.50 लाख रुपये निकाल लिए गए।
  • हैंडपंप खनन (मा. शाला और दशरथ सोनी के घर के पास): राशि स्वीकृत हुई और 62,500 तथा 60,000 रुपये क्रमशः निकाल भी लिए गए।
  • प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी में टैप नल विस्तार: वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1.25 लाख के कार्यों में से दोनों जगह 62,500 – 62,500 रुपये की निकासी हो गई।
  • सीसी रोड और पचरी निर्माण: रविन्द्र नाथ के घर से सुधारू घर तक नाली और सीसी रोड के नाम पर 62,500 और 75,000 रुपये निकाल लिए गए। मरघटी तालाब में पचरी निर्माण और मटेरियल के नाम पर 2026 तक के एडवांस फर्जीवाड़े किए गए हैं।

​कुल मिलाकर 16 से अधिक ऐसे निर्माण कार्य हैं, जिनकी लाखों की राशि पंचायत के खाते से गायब हो चुकी है, लेकिन मौके पर ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

सिस्टम का ‘सिंडिकेट’: सीएम हेल्पलाइन की शिकायत को भी दबाने की कोशिश – इस खुले भ्रष्टाचार की शिकायत लोकनाथ (मो. 8770967905) द्वारा 18 जून 2026 को सीएम हेल्पलाइन (टोकन नंबर: CC260600025503) में दर्ज कराई गई। लेकिन सिस्टम की मिलीभगत देखिए! शिकायत दर्ज होने के अगले ही दिन (19 जून) लेवल-1 (L1) के अधिकारी ने बिना किसी जांच और बिना शिकायतकर्ता की संतुष्टि के शिकायत को ‘निराकृत’ मानकर फाइल बंद करने की कोशिश की।

​जब शिकायतकर्ता ने इस ‘हवा-हवाई’ जांच पर असंतोष जताया, तब जाकर 22 जून 2026 को यह मामला लेवल-2 (L2) अधिकारी को भेजा गया है, जो फिलहाल ‘प्रक्रियाधीन’ है। जनपद पंचायत जिला प्रशासन को इसकी सूचना पहले ही दी जा चुकी थी, लेकिन कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।

उठते हैं सुलगते सवाल:

  • ​बिना ग्राम पंचायत की बैठक के 15वें वित्त आयोग की राशि सरपंच-सचिव ने कैसे आहरित कर ली?
  • ​2020 से लेकर 2026 तक पंचायत में फर्जीवाड़ा चलता रहा, तो जनपद पंचायत के आला अधिकारी क्या कर रहे थे?
  • ​लेवल-1 के अधिकारी ने आखिर किसके दबाव में शिकायतकर्ता से बात किए बिना ही मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की?

​कुमेकेला की जनता अब सीधा सवाल पूछ रही है— क्या उच्च अधिकारी इस दस्तावेजी सबूतों के आधार पर भ्रष्ट सरपंच और सचिव पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर रिकवरी की कार्रवाई करेंगे, या फिर ‘सिस्टम के सिंडिकेट’ में यह 18 लाख का घोटाला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!