बालोद

अपनी जमीन के लिए भटक रहा आदिवासी किसान

गैर-आदिवासी पर कब्जे और जातिसूचक गाली देने का आरोप

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/गुण्डरदेही। जिले में आदिवासी जमीनों पर कथित कब्जे का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला गुण्डरदेही क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक आदिवासी किसान अपनी ही कृषि भूमि का कब्जा वापस पाने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर बताया जा रहा है। पीड़ित किसान सुरेश कुमार ध्रुव, निवासी ग्राम गाड़ाडीह (हीरा), तहसील कुरूद जिला धमतरी ने कलेक्टर बालोद को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उसकी पैतृक कृषि भूमि पर एक गैर-आदिवासी व्यक्ति द्वारा वर्षों से कब्जा कर खेती की जा रही है।

आवेदन के अनुसार किसान ने वर्ष 2006 में आर्थिक जरूरत के चलते जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन आदिवासी भूमि गैर-आदिवासी को विक्रय करने की अनुमति नहीं मिलने के कारण पंजीयन नहीं हो सका। किसान का आरोप है कि अनुमति निरस्त होने के बाद उसने संबंधित व्यक्ति को दी गई राशि लौटाने और दस्तावेज वापस लेने का प्रयास किया, लेकिन जमीन का कब्जा वापस नहीं मिला। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब भी वह अपनी जमीन पर खेती करने पहुंचता है, तब उसके साथ जातिसूचक गाली-गलौज और मारपीट की जाती है। पीड़ित ने प्रशासन को सौंपे आवेदन में यह भी दावा किया है कि पूर्व में कई बार शिकायत देने के बावजूद कार्यवाही नहीं हुई, जिसके कारण वह मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानी झेल रहा है। आवेदन में आरोपी पर दबंगई और राजनीतिक पहुंच का भी आरोप लगाया गया है।

क्या कहता है छत्तीसगढ़ का कानून?
गुण्डरदेही में अनुसूचित जनजाति की भूमि को विशेष कानूनी संरक्षण प्राप्त है। सामान्यतः आदिवासी कृषि भूमि को गैर-आदिवासी व्यक्ति को बेचने या हस्तांतरित करने के लिए प्रशासनिक अनुमति आवश्यक होती है। बिना वैधानिक अनुमति के जमीन पर कब्जा या फर्जी दस्तावेजों के जरिए हस्तांतरण विवाद का विषय बन सकता है। कई मामलों में प्रशासन द्वारा जमीन मूल भू-स्वामी को वापस दिलाने की कार्यवाही भी की जाती रही है।

यदि किसी आदिवासी व्यक्ति के साथ जातिसूचक गाली-गलौज, दबाव या जबरन कब्जे की शिकायत होती है, तो मामला अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी जांच के दायरे में आ सकता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्यवाही करता है और क्या एक आदिवासी किसान को उसकी जमीन का अधिकार वापस मिल पाता है या फिर फाइलों की धूल में उसकी उम्मीदें दबकर रह जाएंगी।

Feroz Ahmed Khan

संभाग प्रभारी : दुर्ग

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