खौफ का अड्डा बना मोहला का ‘जलपान होटल’: चंद दिनों के भीतर दूसरे कर्मचारी की रहस्यमयी मौत, फंदे से झूलती मिली लाश!…

मोहला-मानपुर। मोहला का फव्वारा चौक स्थित ‘जलपान होटल’ अब जलपान का नहीं, बल्कि खौफ और मौत का नया अड्डा बनता जा रहा है। इलाके में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब इसी होटल के एक कर्मचारी की लाश परिसर के पिछले हिस्से में मौजूद रसोईघर में फंदे से लटकती पाई गई। एक के बाद एक हो रही इन खौफनाक घटनाओं ने पूरे मोहला को दहशत में डाल दिया है।
दृश्य और दहशत : रसोईघर में झूलती मौत – घटना की भनक लगते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) समेत पुलिस महकमे के तमाम आला अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने फंदे से लटकते शव को नीचे उतारा और पंचनामा की कार्रवाई कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
बड़ा सवाल : आखिर ऐसा क्या हुआ कि कर्मचारी को फंदे पर झूलना पड़ा? यह आत्महत्या है या फिर आत्महत्या का रूप दी गई कोई खौफनाक साजिश?
फ्लैशबैक: 24 मई की वो सड़ी-गली लाश… इस घटना ने इलाके में इसलिए भी भूचाल ला दिया है क्योंकि ठीक कुछ दिन पहले, 24 मई को इसी जलपान होटल के एक अन्य कर्मचारी का शव मोहला से कुछ ही दूरी पर स्थित एक नाले में सड़ी-गली और बेहद खौफनाक अवस्था में मिला था। पुलिस अभी पहली मौत की गुत्थी सुलझा भी नहीं पाई थी कि अब इस दूसरे कर्मचारी की रहस्यमयी मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली और होटल के अंदर चल रहे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुलगते सवाल जो जवाब मांग रहे हैं :
- संयोग या साजिश? एक ही होटल के दो कर्मचारियों की चंद दिनों के अंतराल में संदिग्ध मौत होना क्या महज इत्तेफाक हो सकता है?
- होटल के अंदर क्या चल रहा है? क्या इन दोनों कर्मचारियों को कोई ऐसा राज पता था, जिसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी?
- पुलिस के हाथ खाली क्यों? 24 मई की घटना के बाद भी क्या पुलिस या होटल प्रबंधन की ओर से कोई लापरवाही बरती गई?
क्या कहती है पुलिस? – फिलहाल पुलिस के हाथ खाली हैं और मौत का असली कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। पुलिस हर एंगल से, खासकर दोनों मौतों के बीच के खौफनाक ‘कनेक्शन’ को तलाशने में जुट गई है।
अब देखना यह है कि मोहला पुलिस इस ‘डेथ मिस्ट्री’ से पर्दा उठा पाती है, या फिर यह मामला भी अनसुलझी फाइलों में दफन हो जाएगा। पूरे इलाके की निगाहें अब जांच की सुई पर टिकी हैं!
