तमनार में अवैध शराब का खुला खेल : ढाबों और किराना दुकानों में सज रही महफिलें, अधिकारी बेखबर या ‘साहब’ बिक गए?…

रायगढ़ (ग्राउंड रिपोर्ट।) तमनार क्षेत्र में इन दिनों नियम-कानून ताक पर रख दिए गए हैं। एक तरफ सरकार राजस्व के लिए अधिकृत शराब दुकानें संचालित कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र के ढाबों और गली-मोहल्ले की पसंदीदा किराना दुकानों में अवैध शराब की खुलेआम बिक्री हो रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था और आबकारी विभाग के सारे दावे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं।
किराना दुकानों में राशन की आड़ में शराब का कारोबार – आम जनता राशन लेने जिन किराना दुकानों में जाती है, वहां अब गुपचुप तरीके से ‘ब्रांडेड’ शराब की बोतलें परोसी जा रही हैं। ढाबों का हाल तो और भी बेखौफ है; रात ढलते ही ये ढाबे अवैध मयखानों में तब्दील हो जाते हैं। जैसा कि सामने आई तस्वीर में तमनार की ‘शासकीय विदेशी मदिरा दुकान’ को देखा जा सकता है। अहम सवाल यह उठता है कि जब क्षेत्र में सरकारी दुकान मौजूद है, तो फिर किराना दुकानों और ढाबों तक शराब का यह अवैध जखीरा किसकी शह पर पहुँच रहा है? क्या सरकारी दुकानों के आस-पास सक्रिय बिचौलियों के माध्यम से ही यह ‘सप्लाई चेन’ चलाई जा रही है?
पुलिस की कार्यप्रणाली और चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल – इस पूरे खेल में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय पुलिस तंत्र और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर खड़ा होता है। यह असंभव है कि क्षेत्र के हर दूसरे ढाबे और दुकान में शराब बिक रही हो और बीट प्रभारियों या पुलिस अधिकारियों को इसकी भनक तक न लगे। इस मामले में पुलिस अधिकारी (संदर्भ: 1002541740.jpg) की भूमिका और खामोशी दोनों संदेह के घेरे में हैं।
तमनार की आम जनता और प्रबुद्ध नागरिक अब खुलेआम यह सवाल पूछने को मजबूर हैं कि— क्या वास्तव में अधिकारियों को इस अवैध कारोबार की भनक नहीं है, या फिर चंद रुपयों की ‘मंथली’ के लालच में ‘साहब’ बिक गए हैं?
समाज पर पड़ रहा गहरा असर – लंबे समय से बेखौफ चल रहे इस काले कारोबार ने स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं का जीना मुहाल कर दिया है। गली-नुक्कड़ पर शराबियों का जमावड़ा, आए दिन होने वाले विवाद और बिगड़ता माहौल अब तमनार के लिए आम बात हो गई है।
अब देखना यह है कि क्या जिले के आला अधिकारी (एसपी और कलेक्टर) इस ‘सिंडिकेट’ को तोड़ने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर तमनार का यह अवैध शराब कारोबार प्रशासन की ‘कथित’ सरपरस्ती में यूं ही फलता-फूलता रहेगा? जवाबदेही तय होना नितांत आवश्यक है, अन्यथा जनता का खाकी और प्रशासन से भरोसा उठना तय है।




