बालोद का खौफनाक सच : 3 साल की मासूम की कब्र से कटा सिर, 90 दिन बाद भी ‘खाकी’ के हाथ खाली!…

बालोद (छत्तीसगढ़)। क्या तंत्र-मंत्र के खौफ और अंधविश्वास ने कानून व्यवस्था को भी लकवाग्रस्त कर दिया है? बालोद जिले के गुंडरदेही थाना क्षेत्र से एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जो न केवल पुलिस की जांच प्रणाली पर कालिख पोतता है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब करता है। ग्राम माहुद-बी में 3 साल की मासूम प्रिया साहू की कब्र खोदकर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया। घटना को तीन महीने (90 दिन) बीत चुके हैं, लेकिन बालोद पुलिस के हाथ अब भी पूरी तरह खाली हैं।
ख़बर के तीखे और अहम बिंदु :
- तंत्र-मंत्र की खौफनाक वारदात : 14 फरवरी की रात 3 साल की मासूम का शव कब्र से निकालकर उसका सिर काट लिया गया। मौके पर तांत्रिक सामग्री मिली, लेकिन पुलिस सुराग ढूंढने में पूरी तरह नाकाम रही।
- रक्षक बने भक्षक : ग्रामीणों का सनसनीखेज आरोप—हल्दी चौकी प्रभारी लता तिवारी जांच की प्रगति बताने के बजाय, सवाल पूछने वाले ग्रामीणों को ही धमका रही हैं।
- देर से जागी पुलिस : 3 महीने की घोर लापरवाही और कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन के बाद, अब दबाव में आकर SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया गया है।
- सिस्टम से उठा भरोसा : पुलिस की नाकामी से हताश ग्रामीण अब न्याय के लिए ‘थाने की चौखट’ छोड़कर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक ‘आंगा देव’ की शरण में पहुंच गए हैं।
इंसाफ मांगने पर मिलती हैं धमकियां! – सोमवार को जब माहुद-बी के आक्रोशित ग्रामीण इंसाफ की गुहार लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो प्रशासन का अमानवीय चेहरा एक बार फिर सामने आया। ग्रामीणों को शुरुआत में गेट पर ही रोकने की कोशिश की गई। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर हल्दी चौकी प्रभारी लता तिवारी पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। उनका कहना है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बजाय, न्याय मांगने वाले ग्रामीणों की ही आवाज दबाने और उच्चाधिकारियों तक शिकायत न पहुंचने देने का दबाव बना रही है। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस अपनी नाकामी छिपा रही है या फिर किसी बड़े रसूखदार तांत्रिक को बचाने का खेल चल रहा है?
14 फरवरी की वो खौफनाक रात – बता दें कि 14 फरवरी को जब प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में कब्र खोदी गई थी, तो मासूम प्रिया का बिना सिर का धड़ देखकर हर किसी की रूह कांप उठी थी। मौके से मिली तंत्र-मंत्र की सामग्री चीख-चीख कर किसी खौफनाक तांत्रिक अनुष्ठान की गवाही दे रही थी। इसके बावजूद, पुलिस की जांच कछुआ चाल से भी धीमी रही, जिसने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं और पूरे गांव को दहशत के साये में जीने को मजबूर कर दिया है।
एएसपी की सफाई और ‘आंगा देव’ पर अंतिम आस – कलेक्ट्रेट में हंगामे और एसपी से मिलने की जिद पर अड़े ग्रामीणों को शांत कराने पहुंची अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर ने कहा कि मामले में SIT का गठन कर दिया गया है। लेकिन 90 दिन बाद SIT का गठन पुलिस की सक्रियता कम और बवाल से बचने की कवायद ज्यादा नजर आती है।
वर्दी की इस घोर निष्क्रियता से टूट चुके ग्रामीणों ने अब तय किया है कि वे न्याय के लिए ‘आंगा देव’ का आह्वान करेंगे। जब कानून से न्याय की उम्मीद खत्म हो जाती है, तब जनता को ईश्वरीय शक्तियों का ही सहारा बचता है। ग्रामीण अब धार्मिक अनुष्ठान के जरिए दोषियों की पहचान करने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने उसी पुलिस से सुरक्षा मांगी है, जो अब तक उन्हें न्याय देने में विफल रही है।
क्या बालोद प्रशासन इस खौफनाक अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के सिंडिकेट को तोड़ पाएगा, या एक मासूम का कटा हुआ सिर हमेशा के लिए पुलिस की धूल फांकती फाइलों में दफन हो जाएगा? यह सिस्टम पर एक बहुत बड़ा तमाचा है।




