बिलासपुर ब्रेकिंग : वकीलों ने ही रची ‘फर्जीवाड़े’ की कानूनी साजिश, अदालत को गुमराह करने वाले 4 अधिवक्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज!…जाने पूरा मामला…

बिलासपुर। कानून के रखवाले ही जब कानून के साथ खिलवाड़ करने लगें, तो न्याय की उम्मीद किस पर टिकी रहे? बिलासपुर जिला न्यायालय से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ खुद को “विधि का जानकार” बताने वाले चार अधिवक्ताओं ने फर्जी दावों के सहारे अदालत की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश की। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।
अदालत के साथ जालसाजी : मृतक की पत्नी ही बदल डाली – मामला दशम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण का है। अभियोजन के अनुसार, अधिवक्ता एन.पी. चंद्रवंशी, श्रीमती भगवती कश्यप, शुभम चंद्रवंशी और सूरज कुमार ने मिलकर मृतक प्रभात कुजुर की मौत पर मुआवजे के लिए एक फर्जी क्लेम (धारा 166 मोटर यान अधिनियम) पेश किया।
हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने प्रेमिका कुजुर नाम की महिला को मृतक की पत्नी बताकर पेश कर दिया। इस साजिश का खुलासा तब हुआ जब असली प्रेमिका कुजुर कोर्ट में हाजिर हुई और उसने यह बयान देकर सबको सन्न कर दिया कि:
- वह मृतक प्रभात कुजुर की नहीं, बल्कि जोनी कुजुर की पत्नी है।
- उसने कभी किसी वकील को अधिकृत नहीं किया और न ही किसी दावे या वकालतनामे पर हस्ताक्षर किए।
- अधिवक्ता भगवती कश्यप ने किसी अनजान महिला को ‘प्रेमिका कुजुर’ बनाकर शपथ आयुक्त के सामने खड़ा किया और फर्जी पहचान कराई।
कानून की इन धाराओं में फंसे ‘काले कोट’ वाले – पुलिस ने थाना सिविल लाइन में आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 502/2026 के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। शुरुआत में धारा 228, 229, 233, 246, 318, 335, 336 और 61 के तहत केस दर्ज था, लेकिन जाँच के बाद इसमें धारा 338 (जालसाजी की गंभीर श्रेणी) और 340(2) भी जोड़ दी गई है, जिसमें 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
अदालत की सख्त टिप्पणी: “विधि की अनभिज्ञता का बहाना नहीं चलेगा” – विशेष न्यायाधीश लवकेश प्रताप सिंह बघेल (एट्रोसिटी) ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया। वकीलों की ओर से तर्क दिया गया कि वे निर्दोष हैं और उन्होंने केवल पक्षकार के दस्तावेजों पर भरोसा किया।
लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि:
”आवेदकगण अधिवक्ता होकर विधि के जानकार हैं और उनसे विधि की अनभिज्ञता की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उन पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।”
अग्रिम जमानत नामंजूर, गिरफ्तारी की तलवार – न्यायालय ने मामले की गंभीरता और जालसाजी के तरीके को देखते हुए चारों अभियुक्तों एन.पी. चंद्रवंशी, भगवती कश्यप, शुभम चंद्रवंशी और सूरज वस्त्रकार की धारा 482 (भा.ना.सु.सं.) के तहत पेश अग्रिम जमानत याचिका को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। अब इन अधिवक्ताओं पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।




