जशपुर

विशेष रिपोर्ट : पत्थलगांव में ‘लैंड स्कैम’ पर बड़ा खुलासा, तहसीलदार की रिपोर्ट से मचा हड़कंप!…

भाग 9

जशपुर। जिले के पत्थलगांव इलाके में जमीन के संदिग्ध हस्तांतरण और अवैध कब्जे के मामलों ने अब तूल पकड़ लिया है। तहसीलदार कार्यालय द्वारा पुलिस विभाग को भेजी गई एक गोपनीय रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद भू-माफियाओं के बीच खलबली मच गई है। प्रार्थी की शिकायत पर शुरू हुई यह जांच अब नरेश कुमार सिदार और उनके सहयोगियों के करोड़ों के ‘लैंड बैंक’ तक पहुँच गई है।

मामले की जड़ : एक शिकायत और खुली परतों की पोल : पूरा मामला दर्ज कराई गई एक शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें नरेश कुमार सिदार (निवासी पालीडीह) पर भूमि हस्तांतरण में धोखाधड़ी और संदिग्ध गतिविधियों के आरोप लगाए गए थे। इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (SDOP) ने राजस्व विभाग से आरोपी की संपत्तियों का ब्यौरा माँगा था।

तहसीलदार की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े – तहसीलदार पत्थलगांव द्वारा दिनांक 29.04.2026 को जारी पत्र (क्रमांक 7133) के अनुसार, पटवारी हल्का नंबर 06 और 09 की जांच में भारी-भरकम अचल संपत्ति का खुलासा हुआ है:

ग्राम पालीडीह का रिकॉर्ड : यहां खसरा नंबर 100, 163/1, 163/2, 528, 554, और 561 के तहत कुल 3.149 हेक्टेयर (लगभग 7.78 एकड़) जमीन दर्ज पाई गई है। यह जमीन आनंद कुमार, दीपचंद, नरेश कुमार और अन्य के नाम पर संयुक्त रूप से दर्ज है।

ग्राम पत्थलगांव का रिकॉर्ड: – यहां के व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों में कुल 10 विभिन्न खसरा नंबरों (जैसे 513/24, 513/72, 513/85 आदि) पर 0.672 हेक्टेयर जमीन का मालिकाना हक पाया गया है।

जांच के घेरे में ‘सिदार सिंडिकेट’? – रिपोर्ट में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि नामों की एक लंबी फेहरिस्त है। इसमें आनंद कुमार, दीपचंद, जगजननी, बीससिंह, रोहित कुमार, नरेश कुमार, कमलेश कुमार और शैलेश कुमार जैसे नाम शामिल हैं। प्रशासन अब इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि:

  • ​क्या इन जमीनों का हस्तांतरण नियम विरुद्ध तरीके से किया गया?
  • ​क्या इसमें आदिवासी भूमि नियमों (170-B) का उल्लंघन हुआ है?
  • ​क्या इन संपत्तियों को हासिल करने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी की गई है?

पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें – तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह जानकारी “अग्रिम एवं आवश्यक कार्यवाही” हेतु पुलिस को सौंप दी गई है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सकती है और संबंधित संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर रोक (Kurki or Stay) लगाई जा सकती है।

बड़ा सवाल : क्या पत्थलगांव के इस छोटे से सुराग से जिले के किसी बड़े जमीन घोटाले का पर्दाफाश होगा? जिस तेजी से प्रशासन ने रिकॉर्ड खंगाले हैं, उससे साफ है कि इस बार ‘रसूखदारों’ की खैर नहीं है।

पूर्व में प्रकाशित खबर :

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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