उधारी के 5 हजार… और खूनी अंत! कापू पुलिस ने सुलझाई अंधे कत्ल की गुत्थी, आरोपी सलाखों के पीछे…

रायगढ़: कानून की आंखों में धूल झोंककर भागना मुमकिन नहीं है, और रायगढ़ पुलिस ने एक बार फिर इसे साबित कर दिखाया है। कापू थाना क्षेत्र के ग्राम कुम्हीचुआ में हुए सनसनीखेज ‘अंधे हत्याकांड’ का पुलिस ने महज चंद दिनों में पर्दाफाश कर दिया है। महज 5,000 रुपये की पुरानी उधारी ने एक युवक की जान ले ली और एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया।
बाड़ी में मिली थी लाश, PM रिपोर्ट ने खोले राज : बीती 27 अप्रैल को कुम्हीचुआ निवासी देवव्रत तुरी (30 वर्ष) का शव उसके निर्माणाधीन मकान के पीछे संदिग्ध हालत में मिला था। प्रथम दृष्टया मामला उलझा हुआ था, लेकिन एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में जब पुलिस ने बारीकी से जांच शुरू की, तो परतें खुलने लगीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि देवव्रत की मौत स्वाभाविक नहीं, बल्कि गला दबाने और गले की हड्डी टूटने से हुई थी। यानी, यह एक सोची-समझी हत्या (Culpable Homicide) थी।
6 साल की रंजिश और वो खूनी रात : पुलिसिया जांच में गांव के ही करमसाय नगेसिया का नाम उभरकर सामने आया। पूछताछ में आरोपी पहले तो पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन जब खाकी ने अपना ‘प्रोफेशनल’ रंग दिखाया, तो वह टूट गया। आरोपी ने कुबूल किया कि:
- 6 साल पहले मृतक ने उससे 5,000 रुपये उधार लिए थे।
- पैसे वापस न मिलने पर मार्च में दोनों परिवारों के बीच जमकर विवाद और गांव में बैठक भी हुई थी।
- 26 अप्रैल की रात जब देवव्रत घर के पास दिखा, तो पुराने गुस्से में करमसाय ने उसका मुंह और गला तब तक दबाया, जब तक उसकी सांसें नहीं थम गईं।
- साक्ष्य छुपाने के लिए उसने लाश को घर के पीछे बाड़ी में फेंक दिया।
टीम वर्क से मिला इंसाफ – एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी और थाना प्रभारी इगेश्वर यादव की टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपी को धर दबोचा। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
“उधारी के विवाद में हत्या जैसा जघन्य अपराध कर साक्ष्य छुपाने की कोशिश की गई थी, जिसे कापू पुलिस ने बेहद पेशेवर तरीके से बेनकाब किया है। कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
शशि मोहन सिंह (एसएसपी, रायगढ़)
सावधान रहें : छोटी रकम का विवाद बड़ी तबाही ला सकता है। पुलिस ने अपील की है कि किसी भी विवाद का समाधान आपसी संवाद या कानूनी प्रक्रिया से करें, हिंसा से नहीं।




