थाने में चोर घुसा या थाने का चोर? पुलिस व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल…

बलरामपुर। क्या अब प्रदेश के थाने भी सुरक्षित नहीं रहे? यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि बलरामपुर जिले के बसंतपुर थाना परिसर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और नैतिकता की धज्जियां उड़ा दी हैं। जिस पुलिस पर सुरक्षा का जिम्मा है, उसी की नाक के नीचे कस्टडी में रखे वाहन से सामान चोरी होने का आरोप लगा है।

न्याय की आस में पहुंचे मालिक के उड़े होश : मामला 27 नवंबर 2025 से शुरू होता है, जब पुलिस ने धान से लदी एक पिकअप (UP 64 CT 4056) को जब्त किया था। महीनों की कानूनी लड़ाई के बाद, जब 24 अप्रैल 2026 को कलेक्टर कार्यालय के आदेश पर वाहन मालिक मटुकधारी अपनी गाड़ी छुड़ाने थाने पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

पीड़ित के गंभीर आरोप:
- टायरों की अदला-बदली: गाड़ी के दो ब्रांड न्यू टायर गायब थे, उनकी जगह पुराने और सड़े-गले टायर चढ़ा दिए गए थे।
- माल पर हाथ साफ: कुल 67 बोरी धान में से 4 बोरियां गायब मिलीं।
- साफ संकेत: मौके पर मौजूद पत्रकारों ने भी पुष्टि की कि नए वाहन में पुराने टायरों का होना सीधे तौर पर ‘अंदरूनी खेल’ की ओर इशारा करता है।
“जब थाने के भीतर खड़ी गाड़ियां सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करे? जब तक मेरा सामान वापस नहीं मिलता, मैं गाड़ी यहाँ से नहीं ले जाऊंगा।”
मटुकधारी, पीड़ित वाहन मालिक
पुरानी यादें ताजा : क्या बसंतपुर में ‘दरिमा कांड’ दोहराया गया? – यह पहली बार नहीं है जब पुलिस कस्टडी में सेंध लगी हो। इससे पहले सरगुजा के दरिमा थाने में भी ठीक इसी तरह ट्रैक्टर के टायर और पार्ट्स चोरी करने के आरोप में प्रधान आरक्षक संतोष गुप्ता और आरक्षक जगेश्वर बघेल पर गाज गिर चुकी है।
- दरिमा मामले में सजा : दोषी पुलिसकर्मियों को डिमोट कर दंडित किया गया था।
- सवाल : क्या बसंतपुर थाने में भी वही ‘सिंडिकेट’ सक्रिय है जो जब्त वाहनों को अपना निजी गोदाम समझ बैठा है?
जिम्मेदारों की चुप्पी और आश्वासन : हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर विषय पर जानकारी लेने के लिए जब पुलिस अधीक्षक से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। बाद में डीएसपी विश्व दीपक त्रिपाठी ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
तीखे सवाल जो जवाब मांगते हैं :
- क्या थाने के मुंशी और संतरी की जानकारी के बिना टायर बदलना संभव है?
- क्या पुलिस कस्टडी में चोरी हुई है या यह पुलिसकर्मियों की ‘मिलीभगत’ का नतीजा है?
- क्या प्रशासन इस बार मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई करेगा या मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
पुलिस की साख दांव पर है। यदि थानों के भीतर ही ‘चोरी का बाजार’ सजने लगेगा, तो खाकी से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। अब देखना यह है कि बलरामपुर पुलिस अपने दामन पर लगे इस दाग को कैसे धोती है।




