सुप्रीम कोर्ट का कड़ा प्रहार : ‘अदालती आदेशों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं’, छत्तीसगढ़ सरकार को फटकार, कोरबा SP तलब…

नई दिल्ली/रायपुर : देश की सर्वोच्च अदालत ने छत्तीसगढ़ प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका के आदेशों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ ने कोरबा पुलिस की कार्यशैली को “स्पष्ट और जानबूझकर किया गया उल्लंघन” करार दिया है। कोर्ट ने कोरबा के पुलिस अधीक्षक (SP) को कारण बताओ नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का सख्त निर्देश दिया है।
न्यायिक गरिमा पर तल्ख टिप्पणी : ‘यह लापरवाही नहीं, अवहेलना है’ – सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक चूक तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि आदेश की अवहेलना सुनियोजित तरीके से की गई है। अदालत ने टिप्पणी की :
“सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की इस तरह अनदेखी न्याय व्यवस्था की गरिमा के खिलाफ है। न्यायिक निर्देशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं की जा सकती।”
पूरा विवाद : बरी आरोपी और पुलिस की विफलता – इस मामले की गंभीरता को समझने के लिए इसके घटनाक्रम पर नजर डालना जरूरी है :
- मामला : एक आपराधिक प्रकरण में हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
- आदेश : शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को प्रतिवादी क्रमांक-2 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश करने का स्पष्ट निर्देश दिया था।
- तारीखों का फेर : 23 मार्च 2026 के आदेशानुसार आरोपी को 15 अप्रैल को पेश करना था। राज्य ने दावा किया कि उपस्थिति दर्ज हुई, लेकिन 20 अप्रैल की सुनवाई में आरोपी की अनुपस्थिति ने मामले को गंभीर बना दिया।
कटघरे में कोरबा SP : कार्रवाई के संकेत – अदालत ने सीधे जवाबदेही तय करते हुए कोरबा एसपी से जवाब-तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि आदेश का पालन न करने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए?
कोर्ट के सख्त निर्देश:
- व्यक्तिगत उपस्थिति : कोरबा एसपी को निर्धारित सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित रहने का आदेश।
- सुनिश्चित पेशी : प्रतिवादी क्रमांक-2 (आरोपी) की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
- कठोर रुख : जवाब संतोषजनक न होने की स्थिति में अदालत ने सख्त दंडात्मक कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर कड़ा संदेश : सुप्रीम कोर्ट के इस तेवर ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। यह घटनाक्रम रेखांकित करता है कि जब भी प्रशासन न्यायिक आदेशों के प्रति शिथिलता बरतेगा, शीर्ष अदालत अपनी शक्तियों का प्रयोग कर व्यवस्था को आईना दिखाने से पीछे नहीं हटेगी। यह मामला अब केवल एक आरोपी की पेशी का नहीं, बल्कि न्यायिक अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही की मिसाल बन गया है।




