रायगढ़

खाकी का रसूख या गुंडागर्दी? रायगढ़ में आरक्षक की ‘वर्दी’ हुई दागदार, बेबस ग्रामीण पर बरसाए डंडे, गांव की प्यास भी रोकी!… FIR दर्ज…

रायगढ़। पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कुरमापाली गांव में पुसौर थाने में पदस्थ आरक्षक डोलनारायण साव की दबंगई ने मानवता और अनुशासन को शर्मसार कर दिया है। वर्दी के नशे और राजनीतिक रसूख के अहंकार में डूबे इस आरक्षक पर न केवल एक ग्रामीण को बेरहमी से पीटने का आरोप है, बल्कि भीषण गर्मी में सरकारी बोर तोड़कर पूरे गांव को प्यासा रखने का भी कलंक लगा है।

आरोपी आरक्षक डोलनारायण साव

तानाशाही का तांडव : घर के सामने बैठे ग्रामीण को डंडे से पीटा – घटना 13 अप्रैल की रात की है। कुरमापाली निवासी बद्रीका साहू अपने घर के सामने शांति से बैठे थे, तभी आरक्षक डोलनारायण साव अपने साथियों के साथ वहां पहुँचा। आरोप है कि बिना किसी उकसावे के आरक्षक ने माँ-बहन की गंदी गालियां देनी शुरू कर दीं। विरोध करने पर आरक्षक ने अपनी वर्दी का धौंस दिखाया और बद्रीका साहू की कमर पर डंडे से ताबड़तोड़ 5 से 6 वार किए।

“मैं पुलिस वाला हूँ, मेरी पत्नी सरपंच है, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता!” – यह वह धमकी थी जो आरक्षक ने पीटते वक्त दी। इतना ही नहीं, जब बीच-बचाव के लिए पीड़ित की पत्नी और बेटी आईं, तो आरक्षक ने उन्हें भी नहीं बख्शा और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।

जल-शत्रु बना लोकसेवक : सरकारी बोर तोड़ा, गांव में मचा त्राहि-त्राहि – आरक्षक की ‘दबंगई’ यहीं नहीं रुकी। एक तरफ ग्रामीण को लहूलुहान किया, तो दूसरी तरफ गांव की ‘नल-जल योजना’ पर हमला बोल दिया। नशे की हालत में आरक्षक और उसके साथियों ने सार्वजनिक बोर के पाइप और बिजली के तार काट दिए। इस भीषण गर्मी में जहां पानी की एक-एक बूंद कीमती है, वहां एक पुलिसकर्मी ने पूरे गांव की प्यास पर पहरा बिठा दिया। ग्रामीणों ने इसका वीडियो साक्ष्य भी पुलिस को सौंपा है।

कलेक्टर के दखल के बाद FIR, अब निलंबन की मांग – मामला जब तूल पकड़ने लगा और कलेक्ट्रेट मयंक चतुर्वेदी के संज्ञान में आया, तो उनके कड़े निर्देश पर कोतरा रोड पुलिस ने चुप्पी तोड़ी। आरोपी आरक्षक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 296, 351(3),115(2) के तहत धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

ग्रामीणों का आक्रोश : एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पूरे गांव में आरक्षक को निलंबित (Suspend) करने की मांग उठ रही है। ग्रामीणों का स्पष्ट तर्क है कि यदि आरोपी पुलिस में पदस्थ रहा, तो वह गवाहों को डरा सकता है और जांच को प्रभावित कर सकता है।

अनसुलझे सवाल : सरकारी संपत्ति को नुकसान पर चुप्पी क्यों? – हैरानी की बात यह है कि मारपीट के मामले में तो FIR हो गई, लेकिन शासकीय संपत्ति (बोर) को तोड़ने के मामले में पुलिस अभी भी ‘जांच जारी है’ का राग अलाप रही है। क्या एक पुलिसकर्मी द्वारा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना अपराध की श्रेणी में नहीं आता? या फिर विभागीय साठगांठ आरोपी को बचाने का रास्ता खोज रही है?

बड़ी बात: एसएसपी शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में जहां रायगढ़ पुलिस अपराधियों पर काल बनकर टूट रही है, वहीं डोलनारायण साव जैसे कर्मचारी विभाग की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘वर्दीधारी दबंग’ पर निलंबन की गाज गिराता है या जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!