कोरबा

कोरबा राखड़ बांध हादसा: राख के मलबे में दबी इंसानियत, 3 घंटे तक गायब रहे जिम्मेदार अधिकारी?…

कोरबा। औद्योगिक नगरी कोरबा के नवागांव (कला) में रविवार को हुए CSEB राखड़ बांध (झाबु डेम) हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा के खोखले दावों की पोल खोल दी है। इस हादसे में एक जेसीबी ऑपरेटर हुलेश्वर कश्यप की बलि चढ़ गई, लेकिन व्यवस्था की संवेदनहीनता का आलम यह रहा कि मौत के टांडव के 3 घंटे बाद तक विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

खौफनाक मंजर: जब सैलाब बनकर टूटा राखड़ – ​मरम्मत कार्य के दौरान जब बांध की दीवार फटी, तो वहां काम कर रहे मजदूरों के पास भागने का रास्ता तक नहीं था। राखड़ का दलदल इतना जानलेवा था कि जेसीबी मशीन खिलौने की तरह बह गई।

  • साहस का परिचय : स्थानीय ग्रामीणों और दर्री थाना पुलिस ने अपनी जान जोखिम में डालकर रेस्क्यू शुरू किया और तीन मजदूरों को मौत के मुंह से बाहर खींच निकाला।
  • बड़ी लापरवाही : यदि समय रहते सुरक्षा ऑडिट किया गया होता, तो हुलेश्वर कश्यप आज जीवित होते।

प्रशासनिक ‘लापतागंज’ : जनता में भारी आक्रोश – हादसे के बाद सबसे शर्मनाक पहलू विभाग की बेरुखी रही। मौके पर चीख-पुकार मची थी, ग्रामीण अपनों को ढूंढ रहे थे, पुलिस संघर्ष कर रही थी, लेकिन CSEB के आला अधिकारी घंटों तक नदारद रहे।

“क्या मजदूरों की जान इतनी सस्ती है?” – यह सवाल आज कोरबा का हर नागरिक पूछ रहा है।

अधिकारियों की इस अनुपस्थिति ने ग्रामीणों के गुस्से में घी डालने का काम किया, जिसके बाद युवा कांग्रेस और स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए दोषियों पर FIR दर्ज करने की मांग की है।

मुआवजा और जांच का ‘सरकारी’ मरहम – बढ़ते दबाव को देख प्रशासन ने मुआवजे का ऐलान तो कर दिया है :

  • तत्काल सहायता : ₹23 लाख की कुल राशि (₹5 लाख नगद और ₹18 लाख चेक)
  • जांच टीम : हादसे की वजहों की पड़ताल के लिए टीम गठित।

तीखे सवाल : जवाब कौन देगा? – यह हादसा महज एक ‘इत्तेफाक’ नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन की जघन्य विफलता है।

  • ​जब बांध जर्जर था, तो मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानक (Safety Protocols) क्यों नहीं अपनाए गए?
  • ​क्या विभाग केवल हादसे होने का इंतजार करता है?
  • ​क्या चंद लाख रुपयों का मुआवजा एक परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य की कमी पूरी कर पाएगा?

कोरबा का यह ‘राखड़ कांड’ भ्रष्टाचार और लापरवाही की उस परत को उजागर करता है, जो विकास की चकाचौंध के पीछे छिपी है। अब देखना यह है कि जांच टीम के कागजों में असली गुनहगारों के नाम आते हैं या हमेशा की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!