महालक्ष्मी कास्टिंग की ‘खूनी’ लापरवाही : 35 फीट ऊपर से गिरे मजदूर की मौत, पुलिस को भनक तक नहीं लगने दी; अब उग्र आंदोलन की तैयारी…

रायगढ़। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। चिराईपानी स्थित महालक्ष्मी कास्टिंग्स प्राइवेट लिमिटेड में सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने एक बार फिर एक मजदूर की बलि ले ली है। बुधवार को हुए इस दर्दनाक हादसे ने न केवल कंपनी के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है, बल्कि घटना को छुपाने की कोशिश ने प्रबंधन की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऊंचाई से गिरा श्रमिक, घंटों तड़पने के बाद तोड़ा दम : जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का निवासी मीर हसन (50 वर्ष), जो यहाँ शाहिद ठेकेदार के मातहत काम करता था, बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे कंपनी के शेड पर चढ़कर फेब्रिकेशन का कार्य कर रहा था। लगभग 35 फीट की ऊंचाई पर काम करते समय मीर हसन का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे कंक्रीट के फर्श पर आ गिरा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गिरने की आवाज और मीर हसन की चीख सुनकर आसपास काम कर रहे मजदूरों की रूह कांप गई। आनन-फानन में उसे रायगढ़ के आरएल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ सिर और शरीर के अन्य अंगों में गंभीर चोट होने के कारण उपचार के दौरान शाम 4 बजे उसकी मौत हो गई।
प्रशासन को रखा अंधेरे में : क्या यह ‘इंडस्ट्रियल मर्डर’ है? – हादसे के बाद महालक्ष्मी कास्टिंग प्रबंधन का रवैया संदेहास्पद रहा। घटना बुधवार सुबह की है, लेकिन स्थानीय थाना प्रभारी या पुलिस प्रशासन को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई। जब गुरुवार को शव पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय (KGH) पहुँचा, तब जाकर पुलिस को इस मामले की जानकारी मिली।
बड़ा सवाल : आखिर क्यों कंपनी प्रबंधन ने इतने बड़े हादसे को पुलिस से छुपाया? क्या सुरक्षा उपकरणों (हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, नेट) की कमी को छिपाने के लिए यह लुका-छिपी का खेल खेला गया?
पिंटू सिंह ने घेरा प्रशासन, उद्योग गेट पर आंदोलन की चेतावनी – स्वास्तिक मजदूर सेवा समिति के जिला अध्यक्ष पिंटू सिंह ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उद्योगों में मजदूरों की मौत अब एक सामान्य बात होती जा रही है क्योंकि प्रबंधन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।
पिंटू सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “प्रबंधन ने जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश की है। कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी अमित कुमार सिंह और शिवम तिवारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जो उनकी संलिप्तता को दर्शाता है। यदि पीड़ित परिवार को न्याय और उचित मुआवजा नहीं मिला, तो संगठन उद्योग के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर उग्र आंदोलन करेगा।”
लापरवाही के वो बिंदु जो खड़े करते हैं सवाल :
- सुरक्षा गियर का अभाव : क्या 35 फीट की ऊंचाई पर काम करते समय मजदूर को सेफ्टी बेल्ट और हेलमेट दिया गया था?
- सूचना में देरी : पुलिस को बुधवार को ही सूचित क्यों नहीं किया गया?
- जिम्मेदारों की चुप्पी : पूछने पर कंपनी के अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब न देना उनकी लापरवाही की पुष्टि करता है।
पुलिस जांच पर टिकी नजरें : पुलिस ने अब मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शव के पोस्टमार्टम के बाद ही चोट की प्रकृति और मौत के कारणों का आधिकारिक खुलासा होगा। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर रायगढ़ के औद्योगिक गलियारों में मजदूरों की ‘सस्ती जान’ की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है।




