रायगढ़ में ‘गुपचुप’ विकास की ‘सिंदूरी’ इबारत : बिना ढोल-नगाड़े के क्यों आए सीएम साय?…

- सियासत का ‘सीक्रेट’ दौरा: जनसंपर्क की नाकामी या अंदरूनी ‘चेस-गेम’ का नया दांव?….
रायगढ़। “मुख्यमंत्री कल देंगे 155 करोड़ की सौगात, आज करेंगे 200 करोड़ के कार्यों का भूमिपूजन…” अमूमन किसी भी सूबे के मुखिया का किसी जिले में आगमन इन्हीं भारी-भरकम, कसीदे कढ़ते सरकारी शीर्षकों से होता आया है। मुख्यमंत्री के अधीन रहने वाला जनसंपर्क विभाग हफ्तों पहले से विकास का ऐसा ‘ढोल’ बजाना शुरू कर देता है कि जनता को हकीकत से ज्यादा विज्ञापन दिखने लगते हैं।
लेकिन रायगढ़ ने आज जो देखा, उसने सत्ता के गलियारों में सन्नाटा भी खींच दिया और सुगबुगाहट भी बढ़ा दी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आए, करोड़ों के लोकार्पण-शिलान्यास भी हुए, समीक्षा बैठक भी हुई… लेकिन बिना किसी तामझाम और बिना किसी सरकारी ढिंढोरे के!
आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि सूबे के मुखिया को अपने ही पुराने संसदीय क्षेत्र में ‘चोरी-छिपे’ (सीक्रेट विजिट) आना पड़ा?
- क्या यह रायगढ़ जिला प्रशासन और जनसंपर्क विभाग की अक्षमता की पराकाष्ठा है?
- क्या यह सीएम हाउस की किसी गुप्त ‘इनर इंजीनियरिंग’ की रणनीति का हिस्सा है?
- या फिर, यह भाजपा के भीतर चल रही किसी अदृश्य राजनैतिक खींचतान का नतीजा है?
वजह चाहे जो भी हो, लेकिन लोकतंत्र में यह ‘गुप्त’ दौरा कई तीखे सवाल छोड़ गया है।
इतवारी बाजार का ‘दफन’ इतिहास: कंक्रीट के जंगल में दबी गरीबों की आहें – इस ‘साइलेंट’ दौरे के बीच रायगढ़ का भूगोल सुधारने के नाम पर उसका इतिहास बदल दिया गया। शहर की पहचान और जनजीवन का हिस्सा रहे ऐतिहासिक ‘इतवारी बाजार’ का नामोनिशान हमेशा के लिए मिटाकर वहां ‘सिंदूर पार्क’ का लोकार्पण कर दिया गया।
कहा जा रहा है कि आसपास के रसूखदारों के घरों के सामने लगने वाली भीड़ को हटाने और इलाके का ‘वास्तु’ दुरुस्त करने के लिए यह सुंदरीकरण हुआ है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे की कड़वी हकीकत यह है कि सैकड़ों गरीब पसरा व्यापारियों (रेहड़ी-पटरी वालों) के पेट पर लात मार दी गई।
तल्ख हकीकत: कंक्रीट की आलीशान सड़कें, चमचमाती महंगी स्ट्रीट लाइटें और गमलों में सजे डिजाइनर पेड़ यहां ‘ऑक्सीजन’ होने का अहसास तो जरूर कराएंगे, लेकिन उस जमीन से उन गरीब ग्रामीणों के रोजगार की खुशबू गायब हो चुकी है। अब इसे ‘शहीद पार्क’ कहिए या ‘सिंदूर पार्क’, उन बेघर हुए दुकानदारों के लिए यह सिर्फ एक उजाड़ दास्तान है।
…अब क्या ही बोलें!
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह बिना शोर-शराबे वाली रायगढ़ यात्रा सादगी का संदेश कम, और सत्ता के भीतर के अंतर्विरोधों का संकेत ज्यादा दे रही है। विकास के नाम पर करोड़ों की सौगातें कागजों पर दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन ‘सिंदूर पार्क’ की इस कृत्रिम चमक में उन सैकड़ों गरीबों की आहें और सिसकियां कहीं दब गई हैं, जिनका आशियाना उजाड़कर इसे सजाया गया है।
अब रायगढ़ की जनता और राजनीति के माहिर खिलाड़ी, दोनों ही एक यक्ष प्रश्न का उत्तर ढूंढ रहे हैं – सीएम का यह ‘चुपके-चुपके’ आना महज़ एक प्रशासनिक चूक थी, या छत्तीसगढ़ भाजपा के भीतर बिछ रही किसी नई राजनैतिक बिसात का पहला मोहरा? जवाब का इंतजार सबको है।




