कवर्धा

कर्ज के ‘चक्रव्यूह’ में फंसा परिवार : 5 करोड़ नहीं मिले तो कारोबारी ने पत्नी और बच्चों संग पिया जहर…स्थिति नाजुक…

कवर्धा। न्याय की उम्मीद जब दम तोड़ देती है, तो इंसान मौत को गले लगाना बेहतर समझता है। कवर्धा जिले में एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बिल्डिंग मटेरियल व्यापारी ने उधार दिए 5 करोड़ रुपये वापस न मिलने और देनदारों की धमकी से तंग आकर अपने पूरे परिवार को जहर दे दिया और खुद भी मौत की घूंट पी ली।

​वर्तमान में पति, पत्नी और दो मासूम बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई है, जो अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

3 पन्नों का सुसाइड नोट : मौत का ‘हिसाब-किताब’ – पुलिस को मौके से जो 3 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, वह किसी डरावने सपने से कम नहीं है। इसमें व्यापारी योगेश जैन ने साल 2020 से 2025 के बीच के पाई-पाई के लेनदेन का जिक्र किया है।

  • लेनदेन : ‘चार ट्रेडर्स’ के नाम पर करीब 3.20 करोड़ रुपये दिए गए थे।
  • कुल बकाया : ब्याज समेत यह राशि 5 करोड़ के पार जा चुकी थी।
  • धमकी : नोट में आरोप है कि जब पैसे मांगे गए, तो आरोपी समसुद्दीन ने न केवल पैसे देने से मना किया, बल्कि व्यापारी को ‘गाड़ी से उड़ाने’ की धमकी भी दी।

​”भाई बहुत परेशान था। समसुद्दीन ने साफ कह दिया था कि जो करना है कर लो, पैसे नहीं दूंगा। इसी मानसिक प्रताड़ना ने मेरे भाई को यह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।”

लक्ष्मीचंद जैन (पीड़ित के बड़े भाई)

आधी रात को मौत का खौफनाक कॉल – घटना मंगलवार रात की है। ढाई बजे जब दुनिया सो रही थी, तब योगेश ने अपने भाई को फोन कर वह बात कही जिसे सुनकर रूह कांप जाए। योगेश ने बताया कि उसने अपनी पत्नी सुमन (37), बेटे प्रिंस (17) और बेटी तारिका (16) को कीटनाशक पिला दिया है और खुद भी पी लिया है। आनन-फानन में परिजनों ने सभी को निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

पुलिस की कार्रवाई और अनसुलझे सवाल – कोतवाली पुलिस ने घटनास्थल को सील कर दिया है। हालांकि, सुसाइड नोट में नामजद आरोपियों पर शिकंजा कसना अभी बाकी है।

  • वर्तमान स्थिति : चारों पीड़ित अचेत हैं, जिससे पुलिस बयान दर्ज नहीं कर पाई है।
  • पुलिस का पक्ष : TI योगेश कश्यप के अनुसार, बयान के बाद ही गिरफ्तारी और आगे की कड़ी कार्रवाई संभव होगी।

संपादकीय टिप्पणी : सफेदपोश ‘गुंडागर्दी’ की भेंट चढ़ता मध्यमवर्ग – यह घटना सिर्फ एक सुसाइड की कोशिश नहीं है, बल्कि उन ‘आर्थिक अपराधियों’ के गाल पर तमाचा है जो दूसरों की मेहनत की कमाई डकार कर उन्हें जान से मारने की धमकी देते हैं। क्या एक व्यापारी का ईमानदारी से पैसा मांगना उसकी मौत का कारण बनना चाहिए? प्रशासन को इस मामले में मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई करनी होगी ताकि भविष्य में कोई दूसरा ‘समसुद्दीन’ किसी परिवार को उजाड़ने की हिम्मत न कर सके।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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