सक्ती जिले में भीषण औद्योगिक हादसा : वेदांता पावर प्लांट में फटा बॉयलर पाइप, 12 श्रमिकों की मौत, 22 घायल…कलेक्टर ने दिए जाँच के आदेश…

सक्ती। सक्ती जिले के डभरा तहसील अंतर्गत सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर लिमिटेड के प्लांट में बुधवार को एक भयावह हादसा हो गया। प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में स्टीम पाइप के वाटर सप्लाई जॉइंट में तकनीकी खराबी के चलते जोरदार धमाका हुआ, जिसकी चपेट में आने से 12 श्रमिकों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 22 अन्य श्रमिक गंभीर रूप से घायल हैं।
हादसे का मंजर: चीख-पुकार और अफरा-तफरी – जानकारी के मुताबिक, हादसा दिनांक 14 अप्रैल 2026 को उस वक्त हुआ जब प्लांट में सामान्य कामकाज चल रहा था। अचानक बॉयलर के पाइप में तकनीकी खराबी आई और जबरदस्त दबाव के साथ रिसाव या धमाका हुआ। मौके पर मौजूद 34 श्रमिक इसकी सीधी चपेट में आ गए। हादसे के बाद प्लांट परिसर में कोहराम मच गया।
अस्पतालों में जिंदगी की जंग : घायल श्रमिकों को आनन-फानन में रायगढ़ के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जिला प्रशासन के अनुसार:
- घायलों का इलाज फोर्टिस जिंदल अस्पताल, एपेक्स अस्पताल और बालाजी मेट्रो अस्पताल (रायगढ़) में युद्ध स्तर पर जारी है।
- कुछ श्रमिकों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
कलेक्टर ने दिए Magisterial जांच के आदेश : मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्ती कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अमृत विकास तोपनो ने ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023’ की धारा 196 के तहत दंडाधिकारी जांच (Magisterial Inquiry) के कड़े आदेश जारी कर दिए हैं। डभरा के अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
जांच के मुख्य 8 बिंदु : किनकी लापरवाही से गई जान? – प्रशासन ने जांच के लिए 8 कड़े सवाल तय किए हैं, जिनका जवाब 30 दिनों के भीतर देना होगा :
- हादसा असल में कब और कैसे घटित हुआ?
- मृतक और घायल श्रमिकों की सूची और उनकी कार्य स्थिति क्या थी?
- वे कौन सी परिस्थितियां थीं जिनके कारण यह हादसा हुआ?
- औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने अब तक प्लांट का कितनी बार निरीक्षण किया और क्या वहां कमियां पाई गई थीं?
- हादसा तकनीकी खराबी थी या मानवीय भूल?
- इस भीषण लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?
- भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या उपाय किए जाएं?
- अन्य कोई बिंदु जो जांच अधिकारी उचित समझें।
बड़ा सवाल : क्या औद्योगिक सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर प्लांट का संचालन किया जा रहा था? क्या सहायक संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा ने नियमित निरीक्षण में कोताही बरती? 30 दिन की इस जांच रिपोर्ट पर अब पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।
पूर्व में प्रकाशित खबर :




