डोंगरगढ़ में गुरु की दरिंदगी: 7वीं के छात्र को जड़े 4 थप्पड़, 80% कान डैमेज; आरोपी शिक्षिका गिरफ्तार!…

राजनांदगांव। शिक्षा के मंदिर में एक मासूम की दुनिया उजाड़ने वाली ‘जल्लाद’ शिक्षिका आखिरकार सलाखों के पीछे पहुँच गई है। डोंगरगढ़ के खालसा पब्लिक स्कूल में अनुशासन के नाम पर बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गईं। महज एक किताब निकालने में हुई देरी की सजा टीचर ने मासूम को उसके सुनने की शक्ति छीन कर दी।
क्या था पूरा मामला? (खौफनाक मंजर) – घटना 2 जुलाई 2025 की है। सोशल साइंस की शिक्षिका प्रियंका सिंह क्लास में दाखिल होती हैं। उन्होंने सार्थक सहारे (13) को किताब निकालने को कहा। मासूम सार्थक समझ नहीं पाया और उसने बस इतना पूछा- “मैम, क्या कहा आपने?”
इतनी सी बात पर शिक्षिका अपना आपा खो बैठीं। उन्होंने सार्थक पर ताबड़तोड़ 4 थप्पड़ बरसा दिए। प्रहार इतना घातक था कि मासूम के कानों के भीतर गंभीर चोटें आईं और उसकी सुनने की क्षमता लगभग खत्म हो गई।
9 महीने का संघर्ष और पुलिस का शिकंजा – पीड़ित परिवार पिछले 9 महीनों से न्याय के लिए दर-दर भटक रहा था। पुलिस की फाइलों में मामला दबा हुआ था, लेकिन SDOP केसरी नंदन नायक के नेतृत्व में पुराने मामलों की समीक्षा हुई और सच सामने आ गया।
- गिरफ्तारी : आरोपी टीचर प्रियंका सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
- स्कूल की साजिश : पिता सुधाकर सहारे का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने न्याय दिलाने के बजाय मामले को दबाने और पीड़ित परिवार को ही गलत साबित करने की पूरी कोशिश की।
गवाहों ने खोली पोल : “वो टीचर नहीं, सजा देने वाली मशीन है” – स्कूल की ही एक छात्रा श्वेता गजभिए ने हिम्मत दिखाते हुए बताया कि प्रियंका सिंह का व्यवहार शुरू से ही हिंसक रहा है। वह बच्चों पर चीखती थीं और बात-बात पर हाथ उठाती थीं। खौफ के कारण बच्चे अब तक चुप थे, लेकिन सार्थक के साथ हुई इस हैवानियत ने सबका सब्र तोड़ दिया।
मासूम की माँ की गुहार : “मेरे बच्चे का भविष्य लौटाओ” – सार्थक की माँ संतोषी सहारे ने सिसकते हुए कहा- “यह सिर्फ थप्पड़ नहीं, मेरे बच्चे की जिंदगी पर हमला है। उसे सुनाई नहीं दे रहा, वह सदमे में है। आरोपी को सस्पेंड किया जाए और स्कूल प्रशासन इलाज का पूरा हर्जाना भरे।”
बड़ा सवाल : क्या डिग्री हासिल कर लेने भर से कोई ‘शिक्षक’ बन जाता है? क्या बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वाला स्कूल प्रबंधन इस अपराध में बराबर का हिस्सेदार नहीं है?
प्रशासन की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि बच्चों पर हाथ उठाने वाले ‘गुरु’ अब बच नहीं पाएंगे।


