सूरजपुर शर्मसार : नौनिहालों के हाथ में किताब की जगह नाले की गंदगी, हेडमास्टर सस्पेंड…

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से मानवता और शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक तरफ सरकार ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ का नारा देती है, वहीं देवीपुर के अंबेडकर पारा स्थित शासकीय माध्यमिक शाला में मासूम बच्चों से नाले के गंदे पानी में मिड-डे-मील के बर्तन धुलवाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद हेडमास्टर को गाज गिरी है।
नाले के दूषित पानी से धुले जा रहे थे ‘सेहत के बर्तन’ – वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर और स्वच्छता को ताक पर रखकर मिड-डे-मील के बड़े-बड़े बर्तनों को नाले के मटमैले पानी से साफ कर रहे हैं। जिस बर्तन में बच्चों का खाना बनना था, उसे ही नाले की गंदगी से धोया जा रहा था। रसोइयों की हड़ताल का हवाला देकर शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी का बोझ मासूम कंधों पर डाल दिया।
प्रशासनिक हंटर : हेडमास्टर सस्पेंड, शिक्षकों की रुकी वेतनवृद्धि – मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अजय मिश्रा ने कड़ी कार्रवाई की है:
- सस्पेंशन : जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर हेडमास्टर मारिया गोरेती को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- वेतनवृद्धि पर रोक : सहायक शिक्षिका प्रेमलता पांडेय और जितेश्वरी की एक-एक वेतनवृद्धि (Increment) रोक दी गई है।
- कारण बताओ नोटिस : संकुल प्राचार्य संतोष मरकाम और समन्वयक सुशील कुमार ठाकुर सहित अन्य को लापरवाही के लिए नोटिस जारी किया गया है।
जांच का कड़वा सच : बीईओ हरेंद्र सिंह की जांच में खुलासा हुआ कि हेडमास्टर और शिक्षकों ने ही खुद खड़े होकर बच्चों को नाले में बर्तन धोने के लिए भेजा था।
बदहाली का सिलसिला : कहीं रेत ढुलाई, तो कहीं पुताई – सूरजपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था के नाम पर बच्चों का शोषण यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री DAV पब्लिक स्कूल में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं:
- मजदूरी का दबाव : RTE (शिक्षा का अधिकार) के तहत पढ़ने वाले गरीब बच्चों से स्कूल में सीमेंट, रेत ढुलाई और पुताई का काम कराया गया।
- धमकी भरा रवैया : काम से मना करने पर मासूमों को स्कूल से निकालने (TC काटने) की धमकी दी जाती थी।
बड़ा सवाल : गुरु या शोषक? – रसोइया संघ की हड़ताल शिक्षकों को यह अधिकार नहीं देती कि वे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करें। मिड-डे-मील का उद्देश्य बच्चों को पोषण देना है, न कि उन्हें संक्रमण और मजदूरी की ओर धकेलना।
क्या महज एक निलंबन से व्यवस्था सुधरेगी या मासूमों का बचपन ऐसे ही ‘नालों’ और ‘मजदूरी’ की भेंट चढ़ता रहेगा?




