छत्तीसगढ़

विशेष रिपोर्ट : छत्तीसगढ़ में ‘सफेदपोश’ अफीम का काला साम्राज्य; दुर्ग के बाद अब बलरामपुर बना नार्को-हब…

रायपुर/बलरामपुर: छत्तीसगढ़, जिसे अब तक शांत प्रदेश और ‘धान का कटोरा’ माना जाता था, वहां अब चोरी-छिपे अफीम की लहलहाती फसलें एक खतरनाक ‘नार्को-सिंडिकेट’ की ओर इशारा कर रही हैं। दुर्ग में भाजपा नेता के फार्म हाउस पर हुई कार्रवाई की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि झारखंड की सरहद से सटे बलरामपुर जिले में अफीम की खेती के एक के बाद एक कई बड़े खुलासे हुए हैं।

​कलेक्टर और एसपी की नाक के नीचे चल रहे इस काले कारोबार ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सत्ताधारी दल की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बलरामपुर: खजूरी और त्रिपुरी में ‘नार्को-नेटवर्क’ का भंडाफोड़ – बलरामपुर जिले के कुसमी और अब करौंधा थाना क्षेत्र अफीम की खेती के नए केंद्र बनकर उभरे हैं।

  • ताजा मामला (खजूरी) : झारखंड सीमा से सटे खजूरी पंचायत के तुर्रापानी इलाके में करीब डेढ़ से दो एकड़ जमीन पर अफीम की फसल लहलहा रही थी। दुर्गम पहाड़ी इलाका होने के कारण यहाँ बाहरी लोगों का आना-जाना कम था, जिसका फायदा तस्करों ने उठाया।
  • कुसमी की बड़ी कार्रवाई : इससे पहले त्रिपुरी गांव में 3 एकड़ 67 डिसमिल जमीन पर अफीम मिली। यहाँ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 354 बोरों में अफीम की खड़ी फसल जब्त की है। मौके से 2 किलो अफीम लेटेक्स (दूध) और पोस्ता दाना भी बरामद हुआ है।

‘फूलों की खेती’ का झांसा और भाजपा नेताओं की संलिप्तता – जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि अफीम उगाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों को ‘फूलों की खेती’ का झांसा दिया गया था।

  • हिरासत में दिग्गज : पुलिस ने अफीम की देखरेख करने वाले जशपुर के भाजपा नेता और पूर्व सरपंच जिरमल राम सहित 7 लोगों को हिरासत में लिया है।
  • झारखंड कनेक्शन : जमीन के मालिकों (रूपदेव और कौशल भगत) ने बताया कि झारखंड के लोगों ने जमीन लीज पर ली थी। सिंचाई के लिए जंगल के स्टॉप डैम से पंप लगाकर पानी पाइपलाइन के जरिए खेतों तक पहुंचाया जाता था। मुख्य सरगना की तलाश में पुलिस टीमें झारखंड रवाना हो चुकी हैं।

दुर्ग : 8 करोड़ का अफीम कांड और ‘बुलडोजर’ न्याय – दुर्ग के जेवरा-सिरसा क्षेत्र में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के फार्म हाउस पर हुई कार्रवाई ने सबको हिला कर रख दिया है।

  • हाई-टेक खेती : करीब 5.62 एकड़ में 14 लाख 30 हजार अफीम के पौधे उगाए गए थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत 7.88 करोड़ आंकी गई है।
  • डिजिटल धोखाधड़ी : आरोपियों ने डिजिटल सर्वे में इस फसल को ‘गेहूं और मक्का’ दर्ज कराया था। सुरक्षा के लिए बाउंसर तैनात किए गए थे ताकि कोई ग्रामीण अंदर न जा सके।
  • प्रशासनिक प्रहार : पुलिस ने विनायक के भाई बृजेश ताम्रकार द्वारा किए गए 20 साल पुराने अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलाकर दुकान जमींदोज कर दी है।

सियासी संग्राम : “सरकार के संरक्षण में नशा” – ​इस मामले ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीधा हमला बोलते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

“दुर्ग तो महज़ पर्दाफ़ाश की शुरुआत थी। अफीम सहित सूखे नशे का कारोबार सुनियोजित तरीके से मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के संरक्षण में चल रहा है। भाजपा नेता अफीम उगा रहे हैं और सरकार उन्हें बचाने में लगी है। यह मुद्दा अब विधानसभा में गूंजेगा।” – भूपेश बघेल (पूर्व मुख्यमंत्री)

छत्तीसगढ़ के लिए खतरे की घंटी : छत्तीसगढ़ में राजस्थान और झारखंड के तस्करों का यह तालमेल बताता है कि प्रदेश अब केवल ट्रांजिट रूट नहीं, बल्कि प्रोडक्शन हब बनता जा रहा है। अगर समय रहते इस सिंडिकेट की जड़ों (खासकर राजनीतिक संरक्षण) पर प्रहार नहीं किया गया, तो प्रदेश ‘उड़ता पंजाब’ की राह पर चल पड़ेगा।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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