विशेष रिपोर्ट : रायगढ़ के ‘रीयल-लाइफ सिंघम’ के डर से अब तो जुर्म ने भी VRS ले लिया है!…

रायगढ़। आज की ताजा और सबसे ‘खौफनाक’ खबर उन लोगों के लिए है जो कानून को खिलौना समझते थे। छत्तीसगढ़ कैडर के जांबाज आईपीएस श्री शशि मोहन सिंह ने जब से रायगढ़ की कमान संभाली है, वहां के अपराधियों के बीच एक अजीब सी ‘बीमारी’ फैल गई है – इसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ‘खाकी फोबिया’ कहा जा रहा है।
अपराधियों का ‘करियर चेंज’ – विश्वसनीय (और थोड़े डरे हुए) सूत्रों का कहना है कि श्री सिंह की एक दहाड़ सुनकर शहर के शातिर चोरों ने अब चोरी छोड़कर ‘भजन मंडली’ बना ली है। सुना है कि कुछ हिस्ट्रीशीटर तो अब सुबह-शाम थाने के बाहर ‘स्वच्छ भारत अभियान’ चला रहे हैं, ताकि साहब की नजर उन पर न पड़ जाए। आखिर साहब की नजर पारखी है – चाहे कैमरे का लेंस हो या मुजरिम का चेहरा, वे दोनों को ही फ्रेम में सेट करना जानते हैं!
रील और रीयल लाइफ का ऐसा ‘कॉम्बो’ कि ऑस्कर भी शरमा जाए – लोग तो सिर्फ वर्दी पहनते हैं, लेकिन शशि मोहन सिंह जी ने वर्दी को ही ‘परफॉर्मेंस आर्ट’ बना दिया है। उनकी तारीफ में क्या कहें? वे इकलौते ऐसे अधिकारी हैं जो मुजरिम को गिरफ्तार भी करते हैं और फिर उसे यह भी समझा देते हैं कि उसकी ‘बॉडी लैंग्वेज’ में कहां कमी थी।
उनकी फिल्म ‘भूलन द मेज’ को नेशनल अवार्ड क्या मिला, रायगढ़ के बदमाशों ने भी अब ‘एक्टिंग’ छोड़ दी है। उन्हें डर है कि अगर साहब ने उनकी ‘बदमाशी की एक्टिंग’ पकड़ ली, तो कहीं उन्हें हवालात में ‘रिटेक’ न देना पड़ जाए।
नवाचार की पराकाष्ठा : साहब का जलवा देखिए! उन्होंने ‘क्लिक सेफ’ अभियान चलाया तो साइबर ठगों ने लैपटॉप बेचकर खेती शुरू कर दी। लोग कहते हैं कि जब श्री सिंह जिले की सड़कों पर निकलते हैं, तो ट्रैफिक सिग्नल भी डर के मारे अपने आप ‘ग्रीन’ हो जाता है, ताकि साहब को एक सेकंड का भी विलंब न हो।
मुजरिमों के लिए बुरी खबर : कुल मिलाकर, श्री सिंह का व्यक्तित्व ऐसा है कि उनके सामने आते ही ‘सत्यमेव जयते’ खुद-ब-खुद बैकग्राउंड म्यूजिक की तरह बजने लगता है। रायगढ़ वालों के लिए तो दिवाली है, लेकिन गुंडों के लिए यह ‘क्लाइमेक्स’ वाला सीन चल रहा है जहाँ विलेन की विदाई तय है।
नोट : इस खबर को पढ़ते समय अगर आपको अपनी पीठ थपथपाने का मन करे, तो समझ लीजिए आप भी साहब के ‘फैन’ बन चुके हैं।




