BIG BREAKING तमनार : जिंदल पावर की राख ने छिना कुंजेमुरा का चैन ; कलेक्टर के कड़े तेवर, क्या अब थमेगा प्रदूषण का ये ‘तांडव’?…

रायगढ़। जिले के तमनार में विकास के नाम पर ‘विनाश’ की सफेद चादर बिछ रही है! मेसर्स जिंदल पॉवर लिमिटेड (JPL) के थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख (ऐश डाइक) ने आसपास के गांवों को गैस चैंबर बना दिया है। ग्रामीणों के सब्र का बांध जब टूटा और शिकायत कलेक्टर की चौखट तक पहुँची, तो प्रशासन ने भी बिना देर किए उद्योग प्रबंधन की चूलें हिला दी हैं।
ग्राउंड जीरो पर जब पहुंचा ‘हंटर’ – पर्यावरण संरक्षण मंडल की टीम ने जब कुंजेमुरा गांव में कदम रखा, तो नजारा भयावह था। हवाओं में घुलती राख और बेबस ग्रामीण – यह तस्वीर गवाही दे रही थी कि उद्योग प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रख दिया है। प्रशासन की इस रेड से पूरे औद्योगिक गलियारे में हड़कंप मच गया है।
“प्रबंधन की लापरवाही का ‘पोस्टमार्टम’ शुरू हो चुका है। अब सिर्फ नोटिस नहीं, सीधे कानूनी हथौड़ा चलेगा!” – प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से सख्त संदेश।
बड़ी लापरवाही के 3 मुख्य सबूत :
- राखड़ प्रबंधन का फेल होना : ऐश डाइक से उड़ती राख रोकने में प्लांट का सिस्टम पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ।
- कागजों पर जल छिड़काव : धूल दबाने के लिए वाटर स्प्रिंकलर सिर्फ फाइलों में चलते मिले, जमीन पर धूल का गुबार था।
- गायब है ग्रीन बेल्ट : पर्यावरण सुरक्षा के लिए बनाई जाने वाली हरित पट्टी का अता-पता नहीं।
प्रशासन का अल्टीमेटम : ‘सुधर जाओ या भुगतो’ – जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आमजन के फेफड़ों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। उद्योग प्रबंधन को चेतावनी दी गई है कि अगर तत्काल प्रभाव से धूल नियंत्रण और हरित पट्टी का विकास नहीं हुआ, तो भारी जुर्माने के साथ-साथ प्लांट के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्यवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
जनता का सवाल: कब तक सहेंगे ये ‘ज़हर’? – कुंजेमुरा के ग्रामीणों ने सीधे शब्दों में कहा है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, ‘साफ हवा’ चाहिए। प्रशासन की इस सख्ती ने उम्मीद जगाई है, लेकिन सवाल वही है – क्या भारी-भरकम जुर्माने और कागजी कार्यवाही से जिंदल प्रबंधन की कार्यशैली बदलेगी?…




