विशेष रिपोर्ट : घरघोड़ा नगर पंचायत में ‘विकास’ की प्यासी तस्वीर!…

- 50 हजार की लागत… पत्थर पर नाम… पर कंठ सूखा: दो महीने से खराब बोरिंग ने खोली सिस्टम की पोल…
घरघोड़ा (रायगढ़): कहते हैं जल ही जीवन है, लेकिन नगर पंचायत घरघोड़ा के वार्डों में प्रशासन की लापरवाही ने इस ‘जीवन’ को ही ‘मजाक’ बना दिया है। विकास के बड़े-बड़े दावों और लोकार्पण की तख्तियों के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई यह है कि सरकारी खजाने से 50 हजार रुपये फूंकने के बाद भी जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है।
लोकार्पण की तैयारी, पर पानी की भारी बीमारी : नगर पंचायत द्वारा पाइपलाइन विस्तार और पानी टंकी का निर्माण कार्य कागजों में तो ‘पूर्ण’ दिख रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यह पूरी योजना पिछले दो महीनों से सफेद हाथी बनी हुई है। मोहल्ले में शान से खड़ी सफेद पानी टंकी (ORIYO) महज एक सजावट की वस्तु बनकर रह गई है। विडंबना देखिए, जिस बोरिंग के दम पर इस टंकी को भरा जाना था, वह पिछले 60 दिनों से अधर में लटका है।
सिस्टम की ‘कुंभकर्णी’ नींद : फाइलें बढ़ीं, पर बोरिंग नहीं सुधरा – आलम यह है कि बोरिंग खराब होने की सूचना बार-बार दिए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ‘एसी’ कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं। स्थानीय निवासियों का आक्रोश चरम पर है। लोगों का कहना है कि:
“दो महीने से हम पानी के लिए भटक रहे हैं। बड़े-बड़े नेताओं के नाम के पत्थर तो लग गए, लेकिन जब नल से पानी ही नहीं टपकना, तो इन पत्थरों का क्या चाटें?”
सरकारी धन की बर्बादी या भ्रष्टाचार की भेंट? – लगभग 50 हजार की लागत से हुए इस कार्य का अब तक विधिवत उद्घाटन भी नहीं हो पाया है। सवाल यह उठता है कि क्या ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से केवल बजट ठिकाने लगाने के लिए यह दिखावा किया गया था? अगर बोरिंग चालू स्थिति में नहीं थी, तो पाइपलाइन बिछाने और टंकी खड़ी करने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?
प्रशासन के सामने तीखे सवाल :
- दो महीने का समय एक बोरिंग दुरुस्त करने के लिए कम पड़ता है क्या?
- क्या जनता के टैक्स के 50 हजार रुपये सिर्फ एक शो-पीस बनाने के लिए थे?
- क्या लोकार्पण का पत्थर लगाने वाले जनप्रतिनिधि इस सूखे कंठ की पुकार सुन पा रहे हैं?
नगर पंचायत घरघोड़ा की यह स्थिति प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। यदि आने वाले कुछ दिनों में बोरिंग दुरुस्त कर जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो प्यासी जनता का यह आक्रोश आने वाले समय में उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।




