छत्तीसगढ़ का ‘महा-बजट’ सत्र आज से : साय सरकार की वित्तीय अग्निपरीक्षा और विपक्ष का २८१३ सवालों वाला ‘चक्रव्यूह’…

रायपुर। विशेष संवाददाता। छत्तीसगढ़ की ६वीं विधानसभा का सबसे महत्वपूर्ण बजट सत्र आज, २३ फरवरी २०२६ से शुरू होने जा रहा है। २० मार्च तक चलने वाले इस २६ दिवसीय सत्र में कुल १५ बैठकें होंगी, जो न केवल राज्य की आर्थिक दशा तय करेंगी, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे राजनीतिक घमासान का केंद्र भी बनेंगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार के लिए यह सत्र ‘विकसित छत्तीसगढ़ २०२७’ के विजन को धरातल पर उतारने का सबसे बड़ा मंच है।
सत्र का आगाज़ : राज्यपाल का विजन और आर्थिक सेहत का कच्चा चिट्ठा – सत्र की औपचारिक शुरुआत सुबह ११ बजे राज्यपाल रमेन डेका के अभिभाषण से होगी। राज्यपाल अपने संबोधन में साय सरकार की पिछले एक साल की उपलब्धियों, ‘महतारी वंदन योजना’ के प्रभाव और बस्तर-सरगुजा में चल रहे विकास कार्यों का खाका पेश करेंगे।
- आर्थिक सर्वेक्षण (२०२५-२६) : अभिभाषण के तुरंत बाद वित्त मंत्री ओपी चौधरी सदन के पटल पर वर्ष २०२५-२६ का आर्थिक सर्वेक्षण रखेंगे। यह दस्तावेज़ राज्य की जीडीपी (GSDP) वृद्धि दर, प्रति व्यक्ति आय और कृषि-उद्योग के विकास का आधिकारिक प्रमाण होगा।
- श्रद्धांजलि : सदन की कार्यवाही के दौरान अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक दीनदयाल पोर्ते को याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
कल पेश होगा २०२६-२७ का ‘डिजिटल बजट’ : सबकी नजरें २४ फरवरी को दोपहर १२:३० बजे पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री ओपी चौधरी वित्तीय वर्ष २०२६-२७ का बजट पेश करेंगे।
- बजट का स्वरूप : माना जा रहा है कि यह बजट पूरी तरह पेपरलेस (डिजिटल) होगा और इसमें ‘अमृत काल’ की तर्ज पर बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और आईटी सेक्टर के लिए बड़े प्रावधान किए जा सकते हैं।
- चर्चा का शेड्यूल : बजट पेश होने के बाद २६ और २७ फरवरी को इस पर सामान्य चर्चा होगी, जिसमें पक्ष-विपक्ष अपनी दलीलें रखेंगे।
विपक्ष की ‘घेराबंदी’ : २८१३ सवालों का प्रहार : इस बार विपक्ष (कांग्रेस) ने सरकार को घेरने के लिए डेटा और सवालों का भारी-भरकम जखीरा तैयार किया है। विधानसभा सचिवालय को प्राप्त सूचनाओं के अनुसार:
- सवालों की बौछार : कुल २८१३ प्रश्न लगाए गए हैं, जिनमें १४३७ तारांकित (जिनका मौखिक जवाब सदन में देना होगा) और १३७८ अतारांकित प्रश्न शामिल हैं।
- ज्वलंत मुद्दे : कानून-व्यवस्था, हाथियों का आतंक, धान खरीदी की विसंगतियां और नई भर्तियों में देरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी है।
- संसदीय अस्त्र : ६१ ध्यानाकर्षण सूचनाएं, ९ शून्यकाल की सूचनाएं और ११२ याचिकाएं विपक्ष के तीखे तेवरों की तस्दीक करती हैं।
नियम १३९ और अशासकीय संकल्प : सत्र के दौरान नियम १३९ के तहत ‘अविलंबनीय लोक महत्व’ के विषय पर चर्चा के लिए एक सूचना प्राप्त हुई है, जो किसी बड़े जनहित के मुद्दे (संभवतः सुरक्षा या स्वास्थ्य) से जुड़ी हो सकती है। इसके अलावा १३ अशासकीय संकल्पों के माध्यम से स्थानीय विधायक अपने क्षेत्रों की बड़ी मांगों को सदन के पटल पर मजबूती से रखेंगे।
विशेष टिप्पणी : वित्त मंत्री ओपी चौधरी का यह बजट इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ को एक ‘आईटी हब’ बनाने और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद की जा रही है। वहीं, विपक्ष की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में सरकार को भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पकड़ के मुद्दों पर घेरने की पूरी रणनीति बनाई गई है।




