धमाका : छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में भेदभाव की ‘जंग’, SP ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिख व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल!…

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पुलिस महकमे में पदोन्नति (Promotion) और वेतनमान को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कबीरधाम (कवर्धा) के एसपी धर्मेंद्र सिंह छबई (IPS 2012) ने सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पुलिस विभाग में चल रहे कथित ‘दोहरे मापदंड’ और ‘भेदभाव’ की पोल खोल दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जिन अधिकारियों पर सीबीआई और गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं, उन्हें प्रमोट किया जा रहा है, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस आधार न होने के बावजूद उन्हें रोका गया है।

खबर के मुख्य बिंदु: क्यों भड़के SP धर्मेंद्र छबई? –
- अनुच्छेद 16 का उल्लंघन : एसपी छबई ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में साफ कहा है कि उनके साथ किया जा रहा व्यवहार भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 (अवसर की समानता) का खुला उल्लंघन है।
- सीबीआई जांच वालों को प्रमोशन, मुझे क्यों नहीं? : पत्र में आरोप लगाया गया है कि महादेव सट्टा एप जैसे बड़े मामलों में घिरे और जिन अधिकारियों (डॉ. आनंद छाबड़ा, प्रशांत अग्रवाल, अभिषेक पल्लव) की जांच सीबीआई को सौंपी गई है, उन्हें प्रमोशन दे दिया गया। वहीं, रजनेश सिंह जैसे अधिकारियों का उदाहरण भी दिया गया जिन पर फोन टैपिंग जैसे गंभीर मामले लंबित हैं।
- नियमों की अपनी-अपनी व्याख्या : एसपी ने गृह मंत्रालय के 15/01/1999 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पदोन्नति केवल तीन स्थितियों (निलंबन, चार्जशीट जारी होना, या न्यायालय में केस लंबित होना) में रोकी जा सकती है। छबई का दावा है कि उन पर इनमें से कोई भी स्थिति लागू नहीं होती, फिर भी उन्हें ‘जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड’ (JAG) और DIG पद की पदोन्नति से वंचित रखा गया है।
- लोकायुक्त जांच का पेंच : एसपी छबई के खिलाफ भोपाल लोकायुक्त में एक जांच लंबित होने की बात कही गई है, लेकिन उनका तर्क है कि जब उनसे भी ज्यादा गंभीर मामलों (सट्टा एप और फोन टैपिंग) वाले अधिकारियों को ‘ग्रीन सिग्नल’ मिल सकता है, तो उनके साथ यह ‘सौतेला व्यवहार’ क्यों?
महकमे में खलबली : “दोहरी नीति” के आरोप – एसपी छबई ने अपने पत्र में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए इसे “जान-बूझकर बदनीयती और पूर्वाग्रह” से की गई कार्रवाई बताया है। उन्होंने सीधे तौर पर विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
“मेरे समान स्थिति वाले अधिकारियों को पदोन्नत किया गया, जबकि मेरे साथ भेदभाव किया गया। यह मेरे मौलिक अधिकारों का हनन है।” धर्मेंद्र सिंह छबई (IPS), पत्र के अंश
क्या है इस पत्र के मायने? – यह मामला केवल एक अधिकारी की पदोन्नति का नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान है। यदि एक ही श्रेणी के अपराध या जांच के दायरे में आने वाले अधिकारियों के लिए अलग-अलग पैमाने अपनाए जा रहे हैं, तो यह आने वाले समय में कानूनी लड़ाई और प्रशासनिक उठापटक का सबब बन सकता है।




