छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला : रायगढ़ के बहुचर्चित मामले में पत्रकार चंद्रकांत (टिल्लू) शर्मा को मिली अग्रिम जमानत, अधिवक्ता अमित शर्मा की दलीलों पर लगी मुहर…

बिलासपुर/रायगढ़ : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रायगढ़ शहर के एक बहुचर्चित मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत शर्मा उर्फ टिल्लू शर्मा को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। यह मामला सोशल मीडिया पोस्ट और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ था, जिसमें पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ अधिवक्ता अमित शर्मा द्वारा पेश की गई मजबूत दलीलों को माननीय मुख्य न्यायाधीश ने स्वीकार किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता अमित शर्मा की दमदार पैरवी : इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी पक्ष की ओर से बिलासपुर हाई कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता अमित शर्मा ने पैरवी की। गौरतलब है कि अमित शर्मा, रायगढ़ शहर के प्रतिष्ठित एवं वयोवृद्ध अधिवक्ता श्री इंद्र प्रसाद शर्मा के सुपुत्र हैं और पिछले 22 वर्षों से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अधिवक्ता अमित शर्मा ने कोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि उनके मुवक्किल एक पेशेवर पत्रकार हैं और उन्हें व्यक्तिगत द्वेष के चलते इस मामले में फंसाया गया है। उन्होंने जोरदार दलील दी कि कथित सोशल मीडिया पोस्ट में किसी भी समुदाय या छठ पर्व के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की गई थी, बल्कि वह एक सामान्य पोस्ट थी।
क्या था पूरा मामला? -यह मामला रायगढ़ के सिटी कोतवाली थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 570/2025 से संबंधित है। पुलिस ने चंद्रकांत (टिल्लू) शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (धर्म, जाति आदि के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देना) और धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप था कि 30 अक्टूबर 2025 को सोशल मीडिया पर की गई उनकी एक पोस्ट ने धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

मुख्य न्यायाधीश का आदेश : मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) माननीय रमेश सिन्हा की कोर्ट में हुई। शासकीय अधिवक्ता द्वारा जमानत का विरोध किए जाने के बावजूद, बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित शर्मा के तर्कों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने माना कि यह मामला अग्रिम जमानत का बनता है।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि :
- आवेदक (चंद्रकांत शर्मा) को गिरफ्तारी की स्थिति में निजी मुचलके पर रिहा किया जाएगा।
- वे गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और ट्रायल कोर्ट के समक्ष नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे।
फैसले के मायने : इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिवक्ता अमित शर्मा की कानूनी सूझबूझ और 22 वर्षों के अनुभव ने इस कठिन मामले में उनके मुवक्किल को बड़ी राहत दिलाई है।



