रायगढ़

“मानवाधिकार दया नहीं, जन्मसिद्ध अधिकार है” : घरघोड़ा न्यायालय परिसर में जजों और अधिवक्ताओं ने कुरीतियों पर किया करारा प्रहार…

घरघोड़ा। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के दिशा-निर्देशन में अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के अवसर पर घरघोड़ा के न्यायिक परिसर में एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला अपर सत्र न्यायालय में आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल संविधान प्रदत्त अधिकारों की बात हुई, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों पर भी करारी चोट की गई।

​कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यायाधीश श्री दामोदर प्रसाद चन्द्रा और न्यायाधीश सुश्री प्रीति झा ने की। इस दौरान तालुका विधिक सेवा समिति और अधिवक्ता संघ ने मिलकर आम नागरिकों को उनके मौलिक और विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

“अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी हो बोध” : कार्यक्रम का आगाज अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री कैलाश गुप्ता ने न्यायाधीशों के स्वागत के साथ किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि मानवाधिकार किसी जाति, धर्म, लिंग या वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह हर इंसान को समान रूप से प्राप्त हैं। उन्होंने कहा, “अधिकार मांगना सही है, लेकिन एक सभ्य समाज के निर्माण के लिए हमें अपने मानवीय दायित्वों को भी नहीं भूलना चाहिए।” साथ ही उन्होंने प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली निशुल्क कानूनी सहायता की विस्तृत जानकारी दी।

“जन्म के साथ ही मिल जाते हैं अधिकार” : सहायक लोक अभियोजन अधिकारी श्री राजेश सिंह ठाकुर ने विषय को और गहराई देते हुए कहा कि मनुष्य कुल में जन्म लेते ही व्यक्ति को कुछ अधिकार स्वतः प्राप्त हो जाते हैं। “किसी भी व्यक्ति के प्रति घृणा रखे बिना उसे सम्मानजनक जीवन, भोजन, और अभिव्यक्ति की आज्ञादी से वंचित न करना ही सच्चा मानवाधिकार है।”

अंधविश्वास और कुरीतियों पर सीधा प्रहार : कार्यक्रम का सबसे धारदार सत्र अधिवक्ता श्री देवेंद्र पण्डा का रहा। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में नासूर बन चुकी ‘टोनही प्रताड़ना’ जैसी घटनाओं और अंधविश्वास पर तीखा प्रहार किया। श्री पण्डा ने घरेलू हिंसा, मानव तस्करी, बाल विवाह और बाल श्रम जैसे गंभीर विषयों पर कानूनी प्रावधान समझाए। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण के अधिकार पर भी प्रकाश डाला और स्पष्ट किया कि कानून अब इन कुरीतियों के खिलाफ कितना सख्त हो चुका है।

13 दिसंबर को नेशनल लोक अदालत : जागरूकता कार्यक्रम के अंत में आगामी 13 दिसंबर को आयोजित होने वाली ‘नेशनल लोक अदालत’ के बारे में जानकारी दी गई और पर्चे बांटे गए, ताकि लोग अपने लंबित मामलों का त्वरित निपटारा कर सकें।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति : यह पूरा आयोजन प्रधान जिला न्यायाधीश श्री जितेंद्र जैन (जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रायगढ़) और विशेष न्यायाधीश श्री शहाबुद्दीन कुरैशी (अध्यक्ष, तालुका विधिक सेवा समिति, घरघोड़ा) के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सहित सभी वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायिक कर्मचारी, पैरालीगल वॉलिंटियर्स—बालकृष्ण, टीकम, लवकुमार – तथा बड़ी संख्या में पक्षकार और आम नागरिक उपस्थित रहे।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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