जशपुर

रिश्वतखोर श्रम निरीक्षक दोषी : अदालत ने सुनाई तीन वर्ष की सश्रम कैद ; ACB की ट्रैप कार्रवाई पर विशेष न्यायालय की दो-टूक मोहर…

जशपुर। सरकारी योजनाओं को अपना निजी कारोबार समझकर चल रहे भ्रष्ट अफसरों के लिए बड़ा संदेश देते हुए विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने श्रम निरीक्षक सुरेश कुर्रे को रिश्वतखोरी के गंभीर अपराध में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष का सश्रम कारावास और 50,000 रुपए का अर्थदंड सुनाया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्येन्द्र कुमार साहू की अदालत ने 26 नवंबर को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

योजना की राशि रोककर ‘कट मनी’ मांग रहा था अफसर : वर्ष 2019 में जशपुर के श्रम कार्यालय में तैनाती के दौरान सुरेश कुर्रे को कौशल विकास योजना से जुड़े दस्तावेजों की जांच का जिम्मा था। योजना के तहत पंजीकृत NGO ‘छग अभिनंदन एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी’ को 6 लाख 37 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि जारी होनी थी, लेकिन निरीक्षक ने फाइल आगे बढ़ाने के बदले संस्था संचालक रमेश कुमार यादव से 1 लाख 90 हजार रुपए की रिश्वत की खुली मांग कर दी।

सरकारी राशि पर ‘नजर’ और सरकारी पद पर ‘नाजायज हक’ – दोनों का यह गठजोड़ शिकायतकर्ता के गले नहीं उतरा और मामला सीधे ACB की दहलीज तक पहुंच गया।

ACB की सटीक मार : 40 हजार लेते ही रंगेहाथ दबोचा : शिकायत की पुष्टि के बाद एसीबी बिलासपुर ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया। 14 अक्टूबर 2019 को टीम ने आरोपी को 40,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए उसी समय गिरफ्तार कर लिया। रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद भी आरोप से बचने का कोई तर्क अदालत में टिक नहीं पाया।

अदालत का स्पष्ट संदेश : रिश्वतखोरी जनहित के खिलाफ सीधा अपराध : अदालत ने माना कि सरकारी योजना की राशि रोककर रिश्वत मांगना केवल आर्थिक अपराध ही नहीं, बल्कि लोकसेवा की मूल भावना से विश्वासघात है। विशेष न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ‘अवैध लाभ’ का प्रयास व्यवस्था को कमजोर करता है और ऐसे अपराध पर अदालत नरमी नहीं बरत सकती।

इस प्रकरण में शासन की ओर से लोक अभियोजक सी.पी. सिंह ने प्रभावी पैरवी की, जबकि आरोपी की ओर से अधिवक्ता अनुराग मोहित नाथ ने पक्ष रखा।

फैसले का प्रभाव : भ्रष्टाचार पर सख्त न्यायपालिका, ACB की कार्रवाई को मजबूती – यह फैसला बताता है कि:

  • सरकारी तंत्र में ‘कट मनी संस्कृति’ को अदालतें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगी।
  • ACB की ट्रैप कार्रवाइयाँ न्यायालय में मजबूती से टिक रही हैं।
  • रिश्वत मांगने का प्रयास भी कानून में ‘गंभीर अपराध’ है, चाहे राशि कितनी ही क्यों न हो।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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