पत्थलगांव में गुरुजी या नटवरलाल? शिक्षा के मंदिर की आड़ में गाड़ियों की ठगी का संगठित गिरोह चला रहा है मास्टर लक्ष्मी नारायण यादव!…

रिपोर्ट डेस्क : विशेष पड़ताल
जशपुर। एक तरफ जहां गुरु को समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता है, वहीं लुड़ेग के प्रधान मुड़ा स्कूल का एक ‘गुरुजी’ शिक्षा के मंदिर को अपने काले कारनामों की ढाल बना रहा है। इस शिक्षक का नाम लक्ष्मी नारायण यादव है। यह शख्स स्कूल में बच्चों का भविष्य संवारने के बजाय, लोगों की गाड़ियां गायब करने और उन्हें गिरवी रखकर ‘संगठित अपराध’ (Organized Crime) का गोरखधंधा चला रहा है।
ठगी का ‘तामझाम’ और गायब होती गाड़ियां – मास्टर लक्ष्मी नारायण यादव की ठगी का शिकार कोई और नहीं, बल्कि उसी के साथ काम करने वाली एक अन्य महिला शिक्षिका, सीता यादव हुई हैं। सीता यादव की स्कॉर्पियो (Scorpio) गाड़ी इस मास्टर ने ले रखी है और अब उसे वापस नहीं कर रहा है। बेचारी शिक्षिका को इंश्योरेंस और फाइनेंस वालों के लगातार फोन आ रहे हैं जिससे वह बेहद मानसिक तनाव में हैं।
- सामने आए एक वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग में जब परेशान शिक्षिका ने लक्ष्मी नारायण से गाड़ी वापस मांगी और कहा कि “कल वापस करवा दीजिए गाड़ी को, इंश्योरेंस वाले बार-बार कॉल कर रहे हैं”, तो इस ‘ठग मास्टर’ का रसूख देखिए।
- गुरुजी बेशर्मी से टालमटोल करते हुए कहते हैं, “उपाय बोलने से… करना ही पड़ेगा तामझाम… मैं शाम को फोन करता हूँ”।
- पीड़ित शिक्षिका साफ कहती हैं कि “कल से मेरे तरफ भी नहीं बन रहा है”, लेकिन गाड़ी लौटाने के बजाय गुरुजी की बहानेबाजी जारी है।
सिर्फ स्कॉर्पियो नहीं, कई गाड़ियां हैं इसके रडार पर – ऑडियो पड़ताल में यह साफ हुआ है कि यह कोई एक गाड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह एक पूरा सिंडिकेट है।
- रायगढ़ में एक टाटा टियागो (Tata Tiago) गाड़ी पकड़ी गई है, जिसका कनेक्शन भी इसी मामले से बताया जा रहा है।
- इसके अलावा पत्थलगांव के एक बाबू की अर्टिगा (Ertiga) गाड़ी का भी जिक्र इस पूरे फर्जीवाड़े में सामने आया है।
- इस गिरोह का काम करने का तरीका ऐसा है कि गाड़ियां किसी और के नाम पर होती हैं, और मास्टर द्वारा उन्हें कहीं और गिरवी रख दिया जाता है।
स्कूल से नदारद, फिर भी सिस्टम मौन – सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह मास्टर साहब अपनी इस ‘ठगी की दुकान’ को चलाने के लिए अपनी सरकारी ड्यूटी से भी लगातार नदारद रहते हैं।
- प्रधान मुड़ा स्कूल के हाजिरी रजिस्टर में मास्टर लक्ष्मी नारायण यादव के हस्ताक्षर नहीं हैं और वह बिना कोई सूचना या छुट्टी लिए स्कूल से गायब है।
- हैरानी की बात यह है कि शिक्षा विभाग के BEO और BRC जैसे अधिकारी इस मनमानी पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
- जब पत्रकारों की टीम ने इस मामले की पड़ताल की, तब जाकर यह खुलासा हुआ कि रजिस्टर में इसकी अनुपस्थिति को लेकर भी स्कूल प्रबंधन द्वारा लीपापोती की जा रही थी।
बड़ा सवाल : क्या शिक्षा विभाग ऐसे दागी शिक्षकों को वेतन देकर पनाह देने के लिए बना है? क्या सीता यादव जैसी पीड़ित शिक्षिका को न्याय मिलेगा, या लक्ष्मी नारायण यादव अपने ‘तामझाम’ से सिस्टम को यूं ही चकमा देता रहेगा? अब वक्त आ गया है कि शिक्षा विभाग (DEO) और पुलिस प्रशासन इस मामले में सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करे!




