शिक्षा के मंदिर में 3 साल तक छात्रा से होती रही गंदी हरकत, पर्दा डालने वाले प्राचार्य पर गिरी गाज; शासन ने तत्काल प्रभाव से किया सस्पेंड…

राजनंदगांव। बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार के तमाम दावों के बीच राजनांदगांव जिले के एक सरकारी स्कूल से रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। विकासखंड छुरिया अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गैंदाटोला में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा के साथ पिछले तीन सालों से छेड़छाड़ और अनुचित मांग का घिनौना खेल चल रहा था। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि स्कूल के मुखिया यानी प्राचार्य को सब कुछ पता था, लेकिन उन्होंने कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाए रखा। अब इस गंभीर लापरवाही और मिलीभगत पर राज्य शासन का कड़ा डंडा चला है। स्कूल शिक्षा विभाग ने संस्था के प्राचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

शिक्षक करता रहा गलत मांग, 3 साल तक मूकदर्शक बने रहे प्राचार्य – मिली जानकारी के मुताबिक, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गैंदाटोला में पदस्थ सहायक शिक्षक (विज्ञान) तिलक राम यदु द्वारा विद्यालय की एक छात्रा पर लगातार गंदी नीयत रखी जा रही थी। शिक्षक छात्रा से अनुचित मांग करता था और उसके साथ लगातार छेड़छाड़ की जा रही थी। यह सिलसिला एक-दो दिन नहीं, बल्कि पूरे 3 वर्षों से लगातार चल रहा था।
संस्था के प्रशासनिक प्रमुख होने के नाते प्राचार्य विनोद कुमार मंडलोई की यह जिम्मेदारी थी कि वे छात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करते और आरोपी शिक्षक पर तत्काल कठोर कार्रवाई करवाते। लेकिन प्राचार्य ने अपनी आंखें मूंद रखीं। उन्होंने न तो थाने में शिकायत दर्ज कराई और न ही उच्च कार्यालय को इस गंभीर अपराध की सूचना दी। प्राचार्य की इस चुप्पी ने आरोपी शिक्षक के हौसले बुलंद रखे।
अखबार के खुलासे और जांच रिपोर्ट के बाद मचा हड़कंप – मामले का भंडाफोड़ दैनिक भास्कर में 6 सितंबर को प्रकाशित खबर के बाद हुआ। खबर छपते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी (राजनंदगांव) और लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ की टीम ने मामले की त्वरित जांच की।
9 सितंबर को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन और प्रस्ताव के अवलोकन में पाया गया कि प्राचार्य विनोद कुमार मंडलोई को स्कूल परिसर में घटित हो रही इस गंभीर घटना की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद उन्होंने उच्च अधिकारियों से तथ्य छिपाए, जो गंभीर प्रशासनिक लापरवाही, अनुशासनहीनता और संदिग्ध आचरण को साबित करता है।
सिविल सेवा नियमों का खुला उल्लंघन, तत्काल निलंबन – स्कूल शिक्षा विभाग, महानदी भवन (मंत्रालय) द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्राचार्य विनोद कुमार मंडलोई का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का खुला उल्लंघन और गंभीर कदाचार है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से आदेश जारी करते हुए:
- छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9(1)(क) के तहत प्राचार्य विनोद कुमार मंडलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
- निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा), दुर्ग नियत किया गया है।
- निलंबन काल में उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही प्राप्त होगा।
शिक्षा जगत में हड़कंप, अब आरोपी शिक्षक पर टिकी निगाहें – स्कूल जैसे पवित्र स्थान पर वर्षों तक छात्रा का मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न होना और प्रशासनिक मुखिया द्वारा उस पर पर्दा डालना शिक्षा व्यवस्था की लचर कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। शासन की इस त्वरित कार्रवाई से लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं, अब इलाके के पालकों और नागरिकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आरोपी सहायक शिक्षक तिलक राम यदु के खिलाफ पुलिस और प्रशासन क्या कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई करता है।



