दुर्ग

दुर्ग में 6 साल की मासूम से दरिंदगी और हत्या : कलयुगी चाचा को फांसी की सजा, 17 महीने में अदालत का ऐतिहासिक फैसला…

दुर्ग। जिले की विशेष पॉक्सो अदालत ने 6 वर्षीय मासूम से दरिंदगी और निर्मम हत्या के रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने सगे चाचा की इस हैवानियत को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ करार देते हुए उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने दो टूक आदेश दिया – “दोषी की गर्दन में फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए।” 163 पन्नों के इस कड़े फैसले में अदालत ने टिप्पणी की कि यह केवल एक मासूम का कत्ल नहीं, बल्कि खून के रिश्तों और भरोसे की भी निर्मम हत्या है।

पवित्र दिन पर हैवानियत का तांडव : ​वारदात 6 अप्रैल 2025 यानी रामनवमी के दिन की है। मोहन नगर थाना क्षेत्र की छह साल की मासूम सुबह करीब 8 बजे पड़ोस में अपनी बुआ-दादी के घर ‘नवकन्या भोज’ में शामिल होने गई थी। वहां छत पर बने कमरे में रह रहे सगे चाचा ने बच्ची के भोलेपन और भरोसे का फायदा उठाकर उसे अपने कमरे में बुलाया। इसके बाद मासूम के साथ वह दरिंदगी की गई जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।

​पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने, सिगरेट से दागने और बेरहमी से नोचने के निशान थे। अत्यधिक सदमे और कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर से बच्ची की तड़प-तड़पकर मौत हो गई।

कार की सीटों के बीच छिपाया शव : हत्या के बाद आरोपी ने साक्ष्य मिटाने की शातिर साजिश रची। उसे मालूम था कि सामने वाले मकान का सीसीटीवी दिन में बंद रहता है और पड़ोस में खड़ी एक कार का दरवाजा खराब है। उसने मासूम के क्षत-विक्षत शव को उसी कार की सीटों के बीच छिपा दिया। रात 9 बजे जब कार से शव बरामद हुआ तो पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था।

फॉरेंसिक साक्ष्य और पुलिस की सटीक जांच – ​एएसपी पद्मश्री तंवर, एएसपी मणि शंकर चंद्रा और टीआई शिव चंद्रा की विशेष टीम ने मामले की कड़ियां जोड़ीं। पूछताछ में चाचा के गुमराह करने वाले बयानों ने शक गहराया और वारदात के 48 घंटे के भीतर 8 अप्रैल 2025 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

  • 9 मई 2025 : पुलिस ने अदालत में पुख्ता चालान पेश किया।
  • 26 मई 2025 : आरोपी के खिलाफ आरोप तय हुए।
  • डीएनए और एफएसएल रिपोर्ट : फॉरेंसिक नमूनों और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी की मौजूदगी और अपराध की अकाट्य पुष्टि कर दी।

सख्त सजा और धाराएं – ​विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार की दलीलों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई:

  • पॉक्सो एक्ट धारा 6(1) : मृत्युदंड (फांसी) और 5,000 रुपये अर्थदंड।
  • बीएनएस धारा 103(1) (हत्या) : मृत्युदंड (फांसी) और 5,000 रुपये अर्थदंड।
  • बीएनएस धारा 238(क) (साक्ष्य छिपाना) : 5 साल का सश्रम कारावास और 1,000 रुपये जुर्माना।
  • मुआवजा : मृतका के पीड़ित परिवार को आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की सहायता राशि देने का आदेश।

​दोषी फिलहाल केंद्रीय जेल दुर्ग में कड़ी निगरानी में रहेगा। नियमानुसार मृत्युदंड के इस फैसले की अंतिम पुष्टि के लिए मामला बिलासपुर हाईकोर्ट भेजा गया है। रामनवमी पर कन्या रूप में पूजी जाने वाली मासूम को 17 महीने और 5 दिन बाद अदालत से पूर्ण न्याय मिला।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!