पत्थलगांव में बच्चों के हक पर डाका : तमता बालक छात्रावास में राशन-सामान का गबन, नौकरी के नाम पर लाखों की उगाही; जांच के नाम पर खुली लीपापोती…

जशपुर। मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में शिक्षा व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं को भ्रष्टाचार का दीमक किस कदर चाट रहा है, इसका जीता-जागता उदाहरण पत्थलगांव विकासखंड का तमता शासकीय बालक छात्रावास है। वर्षों से जमे अधीक्षक बुधनाथ भगत पर मासूम छात्रों की मूलभूत सुविधाओं को डकारने और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के नाम पर लाखों की अवैध उगाही के गंभीर आरोप लगे हैं। संगीन खुलासों के एक सप्ताह बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई शून्य है, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कागजों पर लाखों का खर्च, जमीन पर बच्चे बेहाल – शासन की ओर से छात्रों के लिए हर वर्ष मच्छरदानी, कंबल, तकिया, तेल, साबुन और रसोई के बर्तनों के लिए भारी-भरकम बजट जारी होता है। अधीक्षक की मिलीभगत से यह सारा सामान सिर्फ फाइलों और फर्जी बिलों में सिमट कर रह गया। जमीनी हकीकत यह है कि छात्रावास में रहने वाले गरीब और आदिवासी बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा और अवैध वसूली – अधीक्षक पर पद के दुरुपयोग और फर्जी नियुक्तियों के गंभीर प्रमाण सामने आ रहे हैं:
- कोड़केल खजरी अवैध वसूली: मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नौकरी लगवाने का झांसा देकर कई बेरोजगारों से लाखों रुपये की ठगी की गई।
- अवैध पदस्थापना: बालक एवं कन्या छात्रावास में कार्यरत दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों—स्टीफन खलखो और हेमू अजगले—से मोटी रकम लेकर बिना किसी वैध सरकारी आदेश या पंचायत प्रस्ताव के अवैध रूप से काम पर रख लिया गया।
जांच के नाम पर बंद कमरों का खेल – मामला उछलने के बाद मंडल संयोजक जांच करने पहुंचे, लेकिन पूरी प्रक्रिया केवल खानापूरी साबित हुई। जांच अधिकारी ने न तो शिकायतकर्ताओं के बयान लिए और न ही पीड़ित बच्चों से सच जानने की जहमत उठाई। बंद कमरे में बैठकर जांच समेट ली गई, जिससे स्पष्ट है कि सिस्टम अपने ही भ्रष्ट कारिंदे को बचाने में जुटा है।
किसका वरदहस्त, किसका संरक्षण? – खुलेआम चल रही इस लीपापोती ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या अधीक्षक को किसी प्रभावशाली राजनीतिक आका का संरक्षण प्राप्त है या फिर जांच दबाने के लिए अधिकारियों की जेबें गरम की गई हैं?
ग्रामीणों और अभिभावकों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि आरोपी अधीक्षक को तत्काल निलंबित कर किसी स्वतंत्र टीम से उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। मासूमों के हक का निवाला छीनने वाले इस भ्रष्ट तंत्र पर उच्च अधिकारियों की चुप्पी अब सीधे-सीधे मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।




