प्रशासनिक लापरवाही : पत्थलगांव में भगवान भरोसे झोपड़ीनुमा ‘शासकीय अहाता’, अव्यवस्थाओं से जनता त्रस्त; महंगे दामों पर बिक रहा सड़ा-गला चखना…

जशपुर। पत्थलगांव नगर के रायगढ़ रोड स्थित शासकीय शराब दुकान के समीप संचालित झोपड़ीनुमा अहाता इन दिनों अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और खुली मनमानी का पर्याय बन चुका है। शासन द्वारा सुविधाओं के दावों के बीच धरातल पर सुराप्रेमियों और स्थानीय नागरिकों को केवल दुर्दशा और दुर्व्यवहार ही नसीब हो रहा है। आलम यह है कि सफाई, शौचालय और पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं से महरूम यह अहाता पूरी तरह भगवान भरोसे टिका हुआ है, जबकि आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे हैं।
1. सुविधा शून्य, मनमानी चरम पर: गोपनीयता तक भंग
अहाते का ढांचा इतना जर्जर और नियम-विरुद्ध है कि यहाँ आने वाले लोगों को न्यूनतम प्रसाधन व सफाई तक की सुविधा नहीं मिलती।
- पर्दे की कमी व गोपनीयता का हनन: उचित घेराबंदी या पर्दे की व्यवस्था न होने के कारण अंदर बैठने वालों की गोपनीयता लगातार भंग होती है।
- अग्रिम भुगतान का दबाव: अहाते में बिना एडवांस पैसे दिए एक डिस्पोजल गिलास तक नसीब नहीं होता। विरोध करने पर सीधे दुर्व्यवहार किया जाता है
चौगुने दाम पर बिक रहा बासी व सड़ा-गला ‘चखना’ – अहाते के भीतर खाद्य सामग्री और चखने के नाम पर खुलेआम लूट मची हुई है। नियमों को ताक पर रखकर ग्राहकों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है:
- दाम आसमान पर: ₹2 का डिस्पोजल गिलास ₹5 में बेचा जा रहा है। ₹20 में ₹10 के बराबर भी चखना नहीं मिलता।
- सेहत से खिलवाड़: अहाते में 2 से 3 दिन पुराना फ्रीज में रखा सड़ा-गला चिकन, मछली और बासी मांस खुलेआम बेचा जा रहा है।
- खराब फल व दूषित माहौल: सड़े हुए फल और घटिया गुणवत्ता की सामग्री परोसने से अहाते का वातावरण दुर्गंधयुक्त और दूषित हो चुका है। ग्रामीण व स्थानीय ग्राहक जब इस लूट और अभद्रता का विरोध करते हैं, तो अहाता संचालक उनके साथ बदसलूकी पर उतर आते हैं।
रायगढ़ रोड पर रोज लग रहा लंबा जाम, हादसों को न्योता – अहाता मुख्य रायगढ़ रोड के ठीक किनारे स्थित है, जहाँ पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है।
- अनियंत्रित वाहन व ट्रैफिक जाम: अहाते में आने वाले लोग अपनी गाड़ियाँ सड़क पर ही आड़ी-तिरछी खड़ी कर देते हैं।
- ट्रकों की लंबी कतारें: सड़क संकरी होने और बेतरतीब वाहनों के कारण अक्सर घंटों ट्रैफिक बाधित रहता है और भारी ट्रकों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं।
- बढ़ते सड़क हादसे: इस अव्यवस्था के कारण इस मार्ग पर आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएँ होना आम बात हो गई है, जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों की जान जोखिम में पड़ी रहती है।
शिकायतें रद्दी के टोकरे में, अब जन-आंदोलन की तैयारी – स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों द्वारा इस अव्यवस्था और नियम-विरुद्ध अहाते की शिकायत कई बार उच्च अधिकारियों एवं आबकारी विभाग को लिखित में भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी से आक्रोशित नागरिक अब उग्र आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं।
बड़ा सवाल :
क्या आबकारी विभाग किसी बड़े हादसे या जन-आक्रोश के विस्फोट का इंतजार कर रहा है? या फिर शिकायतों पर संज्ञान लेकर इस फर्जीवाड़े और अव्यवस्था पर नकेल कसी जाएगी? यह आने वाला समय ही बताएगा।




