
जशपुर । एक ऐसी ठगी की कहानी सामने आई है जिसने गाड़ी बेचने वालों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं। एक युवक ने भरोसे में आकर अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी बेची, लेकिन अब उसे अपनी ही गाड़ी के फाइनेंस की किस्तें भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, क्योंकि खरीदार कथित तौर पर किस्तें देने से मुकर गए हैं। इस मामले में पीड़ित ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और न्याय की गुहार लगाई है।
मामला क्या है? – रायगढ़ जिले के चोरंगा के रहने वाले महेंद्र कुमार होता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने अपनी महिंद्रा स्कॉर्पियो (रजिस्ट्रेशन नंबर CG 15 DH 7691) जशपुर जिले के पत्थलगांव के रहने वाले हेमंत कुमार ठाकुर को बेची थी। बिक्री का यह सौदा 09 नवंबर 2024 को एक रजिस्टर्ड इकरारनामे (सहमति पत्र) के माध्यम से हुआ था। कुल सौदा ₹7,26,000 में तय हुआ, जिसमें से महेंद्र होता को ₹70,000 नकद एडवांस मिले थे। बाकी बची रकम ₹6,56,000 चोला मंडलम फाइनेंस कंपनी में थी, जिसे खरीदार हेमंत कुमार ठाकुर को किस्तों में अदा करना था।
ठगी का नया पैंतरा – शिकायतकर्ता के अनुसार, खरीदार हेमंत कुमार ठाकुर ने समझौते के बाद गाड़ी की किस्तें जमा करना बंद कर दिया। जब महेंद्र होता ने किस्तें जमा करने के लिए कहा, तो खरीदार हेमंत ठाकुर और दूसरे व्यक्ति दिनेश सारथी (डुडुगजोर)ने कथित तौर पर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल दी। एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ते हुए उन्होंने किस्तें भरने से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, जब गाड़ी वापस मांगी गई, तो उन्होंने वह भी देने से मना कर दिया।
सिबिल खराब, बैंक का दबाव – पीड़ित महेंद्र होता ने अपनी शिकायत में लिखा है कि गाड़ी की किस्तें न भरने के कारण फाइनेंस कंपनी अब उन्हें परेशान कर रही है। इससे उनका सिबिल (CIBIL) स्कोर पूरी तरह खराब हो गया है, जिससे उन्हें भविष्य में कोई लोन मिलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि खरीदार गाड़ी का नाम हस्तांतरण (Name Transfer) भी नहीं करवा रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
पुलिस से न्याय की गुहार – पीड़ित महेंद्र कुमार होता ने पत्थलगांव थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी वापस दिलाने की मांग की है।
यह मामला एक चेतावनी है कि गाड़ी बेचने-खरीदने के समय कागजी कार्यवाही और नियमों का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। केवल इकरारनामा ही काफी नहीं होता, फाइनेंस और नाम हस्तांतरण की प्रक्रिया भी तुरंत पूरी करनी चाहिए। क्या पुलिस इस “धारदार” ठगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करेगी और पीड़ित को न्याय दिला पाएगी? यह देखने वाली बात होगी।




